देवभोग ब्लाक में 14140 बच्चे को पोलियों दवा पिलाने का लक्ष्य, जिसमें 13469 बच्चे पोलियों दवा पिलाई गई शेष डोर-टू-डोर कार्य जारी 

राजधानी से जनता तक न्यूज/ चरण सिंह क्षेत्रपाल 

गरियाबंद/देवभोग – गरियाबंद जिले के देवभोग विकास खण्ड में राष्ट्रीय संघन पल्स पोलियों अभियान के तहत 21 दिसम्बर 2025 को अभियान का आयोजन किया गया। जिसमें पोलियों बूथ पर 0-05 वर्ष के बच्चों को दवा पिलाई गई। तथा इस अभियान को सफल क्रियान्वयन हेतु 22 से 23 दिसम्बर 2025 को माप अप अभियान के तहत घर-घर जाकर छोटे छोटे नवजात शिशुओं को पोलियों की दो बूंद पिलाई गई। उल्लेखनीय है कि भारत को 27 मार्च 2014 को पोलियों मुक्त सर्टिफिकेट जारी किया जा चुका है। और देश पिछले कुछ सालों से अधिक समय से पोलियों मुक्त है, किंतु पड़ोसी देश पाकिस्तान में 39 तथा अफगानिस्तान में 9 पोलियों के संक्रिय पाए जाने से संक्रमण पैदा होने की खतरा बना हुआ है। इसी को ध्यान में रखते हुए संघन पल्स पोलियों अभियान निरंतर जारी रखीं गईं है। कलेक्टर बीएस उईके की अध्यक्षता एवं मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ यूएस नवरत्न निर्देशन में जिले के प्रत्येक विकास खण्ड में 0-05 वर्ष के बच्चों को पोलियों जैसे गंभीर बीमारी से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से यह अभियान संचालित किया जा रहा है। अभियान के तहत सुबह 8.00 बजे शाम 5.00 बजे तक बच्चों को उनके निकटतम निर्धारित पोलियों बूथ पर दवा पिलाई गई। जिले में कुल 830 पोलियों बूथ के माध्यम से 91 हजार 115 बच्चों को पोलियों की दवा पिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। जिसमें 1 हजार 835 टीम सदस्यों का गठन किया गया था। देवभोग ब्लाक में 14140 बच्चों को पल्स पोलियों की खुराक पिलाई जाने की लक्ष्य निर्धारित है, जिसमें 21 दिसम्बर 2025 को बूथ स्तर पर 13469 बच्चे को पोलियों खुराक पिलाई गई।ओर अभी फिलहाल कुछ शेष बचे बच्चों को उनके घर घर जाकर पोलियों पिलाने में संबंधित विभाग कर्मचारी व स्थानीय अमला आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मितानिन द्वारा कार्य अंतिम तिथि 23 दिसम्बर तक जारी रखी जाएगी। ताकि ग्रामीण क्षेत्रों के 0-5 साल के सभी बच्चे वंचित न रह सके और शासन-प्रशासन द्वारा निर्धारित लक्ष्य शत् प्रतिशत प्राप्त किया जा सके। इसी उद्देश्य से सभी अधिकारी व कर्मचारी ड्यूटी पर तैनात रहकर गांव में प्रत्येक घर डोर-टू-डोर पहल किया जा रहा है।

इस अभियान को सफल क्रियान्वयन हेतु स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी व कर्मचारीयों के साथ आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, मितानिन, कोटवार,प्रशिशु महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता तथा पैरामेडिकल छात्रा छात्राओं की ड्यूटी लगाई गई थी। पोलियों खुराक समय पर उपलब्धता एवं कार्य की प्रभावी निगरानी के लिए सभी पोलियों बूथों को सेक्टरों में विभाजित कर जिला स्तरीय अधिकारी को निरीक्षण एवं पर्यवेक्षण की जिम्मेदारी सौंपी गई थी ‌। पहुंच विहीन क्षेत्र में बच्चों को पोलियों की दवा पिलाने के लिए 36 मोबाइल टीमों का गठन किया गया था। तथा अभियान की व्यापक पहुंच सुनिश्चित करने हेतु ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ शहरी इलाकों में चौंक चौराहे व सार्वजनिक स्थलों पर पोलियों बूथ बनाए गए थे। इसके अतिरिक्त खदानों, ईट-भट्ठा, छात्रावासों, मदरसा एवं छूटे हुए इलाकों में बच्चों को पोलियों की दवा पिलाने के लिए 48 ट्रांजिट टीमों का गठन किया गया था । जबकि घर-घर जाकर दवा पिलाने हेतु 881 टीम सदस्य तैनात किया गये थे। अभियान के दौरान जिला एवं ब्लाक स्तर पर कंट्रोल रूम स्थापित किया गया था। जोकि चौबीस घण्टे तक क्रियाशील रहने तथा कंट्रोल रूम में प्रत्येक घंटे में प्रगति की रिपोर्ट प्राप्त करने हेतु व्यवस्था भी कि गई थी।

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Author: Rajdhani Se Janta Tak

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