सूरजपुर में खाद्य सुरक्षा व्यवस्था ध्वस्त, क्या कार्यालय में बैठकर कर जिम्मेदार कर रहे है खानापूर्ति ?

निरीक्षण के नाम पर खानापूर्ति—होटल–ढाबों में परोसा जा रहा खराब भोजन

फफूंद लगे लड्डू बंटने के बाद उछला मामला, फूड विभाग की जवाबदेही पर उठे बड़े सवाल।

मोहन प्रताप सिंह

राजधानी से जनता तक, सूरजपुर/:– जिले में खाद्य सुरक्षा की स्थिति बेहद लापरवाह होती जा रही है। जरही भटगांव क्षेत्र में एक सरकारी आयोजन में फफूंद लगे लड्डू बांटे जाने के बाद ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है और विभागीय निगरानी की पोल खुलकर सामने आ गई है। स्थानीय लोगों ने फूड विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा है कि जिले में खाद्य निरीक्षण का काम पूरी तरह कागजों में सिमट गया है।

ऑफिस तक सीमित हो गया फूड विभाग?

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि फूड विभाग के अधिकारी और कर्मचारी शायद ही कभी जमीनी स्तर पर निकलते हों। निरीक्षण के नाम पर फाइल अपडेट कर देना ही विभाग की नियमित दिनचर्या बन गई है। नतीजा—जिले के होटल, ढाबा, रेस्टोरेंट और मिठाई दुकानों में मनमानी बढ़ गई है और उपभोक्ता असुरक्षित भोजन खाने को मजबूर हैं।

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होटल–ढाबों में खुलेआम परोसा जा रहा बासी और दूषित खाना

ग्रामीण क्षेत्रों से लगातार शिकायतें हैं कि कई होटल और ढाबों में कई दिनों पुराना बासी खाना, बदबूदार चिकन, बार-बार गर्म किया हुआ तेल और फफूंद तक लगा भोजन परोसा जा रहा है।

स्थिति इतनी बदतर है कि कई दुकानों में साफ-सफाई नाम की कोई व्यवस्था नहीं मिलती। लेकिन फूड विभाग की तरफ से न तो औचक निरीक्षण हो रहा है और न ही किसी बड़े रेस्टोरेंट पर कार्रवाई की जानकारी सामने आती है।

त्योहारों में सक्रिय, बाकी समय में विभाग पूरी तरह गायब

लोगों का आरोप है कि फूड विभाग की सक्रियता केवल रक्षाबंधन, दीपावली, होली जैसे त्योहारों तक ही सीमित होती है।

इन मौकों पर खानापूर्ति के लिए कुछ दुकानें चेक कर ली जाती हैं, लेकिन साल भर जिले की जनता को भगवान भरोसे छोड़ दिया जाता है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या विभाग का काम सिर्फ त्योहारों पर औपचारिकता निभाना है?

फफूंद लगे लड्डू ने खोली विभागीय निगरानी की पोल

बिरसा मुंडा जयंती के अवसर पर सूरजपुर जिले के जनपद पंचायत भैयाथान अंतर्गत एक ग्राम पंचायत में बांटे गए लड्डुओं में फफूंद पाए जाने के बाद ग्रामीणों के मोबाइल में वीडियो और फोटो तेजी से वायरल हुए। लोगों ने बताया कि कार्यक्रम स्थल पर बच्चों और ग्रामीणों को खुलेआम सड़ा-गला मिष्ठान परोसा गया, जबकि आयोजन सरकारी निगरानी में हुआ था। इस घटना ने जिले की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था की वास्तविक तस्वीर सामने ला दी है।

लोगों की मांग—नियमित निरीक्षण शुरू हो, दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई हो

घटना के बाद सामाजिक संगठनों और ग्रामीणों ने एकमत होकर फूड विभाग से गंभीर कदम उठाने की मांग की है।

लोगों का कहना है कि, नियमित निरीक्षण की ठोस व्यवस्था बने, होटल–ढाबों और मिठाई दुकानों से सप्ताहिक नमूने लिए जाएँ और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों – कर्मचारियों पर विभागीय कार्रवाई की जाए।वरना जिले में खाद्य सुरक्षा केवल कागजों पर ही चलती रहेगी।

 

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