खबर का असर: भटगांव अस्पताल कांड पर कलेक्टर एक्शन मोड में।

जांच समिति गठित – दोषियों पर गिरेगी गाज — सूत्र

मोहन प्रताप सिंह

राजधानी से जनता तक, सूरजपुर/भैयाथान:– भटगांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में हुई शर्मनाक लापरवाही पर आखिरकार प्रशासन हरकत में आ गया है। चार घंटे प्रसव पीड़ा से तड़पने के बाद फर्श पर प्रसव कराने और डॉक्टर-नर्स की गैरमौजूदगी का मामला जब मीडिया की सुर्खियों में आया, तो जिला कलेक्टर सूरजपुर ने तत्काल संज्ञान लेते हुए कठोर कदम उठाए।

कलेक्टर का आदेश त्वरित जांच और दोषियों की पहचान

कलेक्टर द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि समाचार पत्र में प्रकाशित तथ्य गंभीर हैं और मानवता को कलंकित करने वाले हैं। मामले की तह तक जाने के लिए दो सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया है, जिसमें डॉ. कपिल देव पैकरा जिला स्वास्थ्य अधिकारी, सूरजपुर (अध्यक्ष), डॉ. राकेश सिंह विकासखंड स्वास्थ्य अधिकारी, भैयाथान (सदस्य) को शामिल किया गया है।

समिति को निर्देश दिया गया है कि समाचार में उल्लिखित प्रत्येक बिंदु की बिंदुवार जांच कर, आज ही अपनी रिपोर्ट कलेक्टर को सौंपें। रिपोर्ट में दोषियों की जिम्मेदारी स्पष्ट होनी चाहिए, ताकि आगे की कार्रवाई बिना देरी के की जा सके।

जांच टीम मौके पर सक्रिय

कलेक्टर के आदेश के तुरंत बाद जांच दल भटगांव अस्पताल पहुंचा। टीम ने अस्पताल परिसर, ड्यूटी रजिस्टर, प्रसव कक्ष और घटना स्थल का निरीक्षण किया। साथ ही मरीज के परिजनों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी दर्ज किए। इस दौरान विकासखंड स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राकेश कुमार सिंह पूरी टीम के साथ मौजूद रहे।

संभावित बड़ी कार्रवाई, विभाग में हलचल

प्रशासनिक सूत्रों की मानें तो यह मामला बेहद संवेदनशील है। दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों पर निलंबन, स्थानांतरण या सेवा समाप्ति जैसी कड़ी कार्रवाई की पूरी संभावना है। यहां तक कि स्वास्थ्य विभाग में बड़ी प्रशासनिक सर्जरी की भी चर्चा है, जो लंबे समय से जमी लापरवाहियों को खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकती है।

घटना जिसने हिला दिया प्रशासन को

यह पूरा मामला 9 अगस्त का है, जब एक गर्भवती महिला प्रसव पीड़ा से कराहती हुई अस्पताल पहुंची। चार घंटे तक कोई डॉक्टर या नर्स नहीं आई। न मजबूर महिला को फर्श पर ही बच्चे को जन्म देना पड़ा, बल्कि खून के धब्बे भी खुद साफ करने पड़े। घटना की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही लोगों में आक्रोश फैल गया और स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर सवालों की बौछार शुरू हो गई।

अब नज़रें कलेक्टर की कार्रवाई पर

जिलेभर की निगाहें अब कलेक्टर की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। यह मामला न केवल भटगांव, बल्कि पूरे जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए एक परीक्षा की घड़ी बन गया है। अगर इस बार सख्त कार्रवाई हुई, तो यह आने वाले समय में लापरवाह स्वास्थ्यकर्मियों के लिए एक कड़ा संदेश साबित होगी।

 

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