नक्सलवाद समाप्ति के ऐतिहासिक अवसर पर केरला पेंदा में भव्य श्रीहनुमंत भंडारा का आयोजन

जिला प्रमुख नवीन दांदडें राजधानी से जनता तक/सुकमा, छत्तीसगढ़ सहित बस्तर अंचल से सशस्त्र नक्सलवाद की समाप्ति के ऐतिहासिक संकल्प की पूर्ति के उपलक्ष्य में आज सुकमा जिले के ग्राम पंचायत केरला पेंदा स्थित प्राचीन राम मंदिर प्रांगण में भव्य श्रीहनुमंत भंडारा का आयोजन किया गया। इस आयोजन में आसपास के ग्रामीणों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर श्रद्धा और उत्साह का परिचय दिया।

करीब 70 वर्ष पुराने इस ऐतिहासिक मंदिर का विशेष महत्व रहा है। नक्सलवाद के प्रभाव के कारण वर्षों तक यह मंदिर बंद पड़ा रहा, लेकिन क्षेत्र में शांति बहाली और नक्सली दबाव कम होने के बाद पिछले दो वर्षों से पुनः यहां पूजा-अर्चना प्रारंभ हुई है। अब इस पावन स्थल पर आयोजित भंडारा, शांति और समृद्धि के नए युग का प्रतीक बन गया है।

ग्रामीणों ने इस आयोजन के माध्यम से भगवान श्रीराम के परम भक्त हनुमान जी महाराज के श्रीचरणों में नमन करते हुए प्रदेश में स्थापित शांति, सुरक्षा और विकास के लिए आभार व्यक्त किया। साथ ही, दशकों तक नक्सलवाद के कारण प्रभावित जनजीवन और बाधित विकास कार्यों को याद करते हुए अब नए युग की शुरुआत का स्वागत किया गया।

ज्ञात हो कि पिछले चार दशकों से छत्तीसगढ़ विशेषकर बस्तर क्षेत्र नक्सलवाद की समस्या से जूझता रहा है, जिससे हजारों लोगों की जान गई और विकास कार्य प्रभावित हुए। लेकिन केंद्र और राज्य सरकार के ठोस प्रयासों तथा सुरक्षा बलों के अदम्य साहस और बलिदान के चलते आज यह ऐतिहासिक उपलब्धि संभव हो सकी है।

इस अवसर पर देश के प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह के संकल्पों का भी स्मरण किया गया, जिनके नेतृत्व में नक्सलवाद के समूल नाश की दिशा में निर्णायक कदम उठाए गए। वहीं मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय तथा उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री श्री विजय शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार की सक्रिय भूमिका की भी सराहना की गई।

कार्यक्रम के दौरान शहीद जवानों के बलिदान को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की गई। उपस्थित जनसमूह ने भगवान हनुमान जी से प्रदेश में स्थायी शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना की।

गृह मंत्री  विजय शर्मा ने इस अवसर पर सभी भक्तजनों को आमंत्रित करते हुए कहा कि हनुमान जी की कृपा से वह लक्ष्य प्राप्त हुआ, जो वर्षों तक असंभव प्रतीत होता था। उन्होंने सभी से इस पावन अवसर पर एकजुट होकर भगवान के श्रीचरणों में नमन करने और प्रदेश के उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रार्थना करने का आह्वान किया।

     यह आयोजन न केवल आस्था का केंद्र बना, बल्कि नक्सलवाद मुक्त बस्तर के नए युग की शुरुआत का प्रतीक भी साबित हुआ।

ISHWAR NAURANGE
Author: ISHWAR NAURANGE

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