नक्सल साये से उभरता मेड़वाही, लेकिन विकास की रोशनी अब भी दूर

दीपिका शोरी ने ग्रामीणों के साथ चौपाल लगाकर सुनी समस्याएं, समाधान का दिया भरोसा

 

जिला प्रमुख नवीन दांदडें

 

मेड़वाही/सुकमा।

कभी नक्सल प्रभाव के लिए चर्चित रहा मेड़वाही गांव अब धीरे-धीरे मुख्यधारा की ओर लौट रहा है, लेकिन विडंबना यह है कि यहां आज भी बुनियादी सुविधाओं का अभाव ग्रामीणों के जीवन को कठिन बना रहा है। लगभग 1200 की आबादी वाले इस दोरला और गोंड़ जनजाति बाहुल्य गांव में कई शासकीय योजनाएं कागजों में सिमटी हुई नजर आती हैं, जबकि जमीनी स्तर पर हालात अब भी जूझते हुए दिखाई देते हैं।

इन्हीं समस्याओं को समझने और ग्रामीणों की आवाज सुनने के लिए छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की सदस्य अधिवक्ता दीपिका शोरी गांव पहुंचीं। उन्होंने चौपाल लगाकर ग्रामीणों से सीधा संवाद किया और उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना। इस दौरान उन्होंने पूर्व नक्सली मड़कम भीमा से भी मुलाकात कर उसके पुनर्वास से जुड़ी दिक्कतों की जानकारी ली।

राशन के लिए 15 किमी की दूरी, भवन बना पर सुविधा नहीं

ग्रामीणों ने बताया कि गांव में पीडीएस भवन तो बना है, लेकिन राशन लेने के लिए 15 किलोमीटर दूर पोलमपल्ली जाना पड़ता है। बरसात के समय नदी पार करना जोखिम भरा होता है, जिससे उन्हें लंबा और कठिन रास्ता तय करना पड़ता है।

अधूरी सड़क और पुल की कमी से टूटा संपर्क

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत स्वीकृत सड़क अधूरी पड़ी है। ठेकेदार द्वारा केवल मिट्टी डालकर काम छोड़ दिया गया है। बारिश में गांव का संपर्क पूरी तरह कट जाता है, जिससे एम्बुलेंस तक नहीं पहुंच पाती और मरीजों को खाट पर ढोकर ले जाना पड़ता है।

सलवा जुडूम की पीड़ा आज भी ताजा

कोया समाज के अध्यक्ष सोढ़ी हांदा ने बताया कि सलवा जुडूम के दौरान अरलमपल्ली में 150 से अधिक घर जला दिए गए थे। आज भी प्रभावित परिवार झोपड़ियों में जीवन यापन कर रहे हैं और प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्के मकानों की मांग कर रहे हैं।

झोपड़ी में पढ़ाई, अधूरा स्कूल भवन

अरलमपल्ली में स्कूल आज भी झोपड़ी में संचालित हो रहा है। शाला भवन का निर्माण अधूरा होने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और शिक्षा व्यवस्था कमजोर बनी हुई है।

पानी के लिए संघर्ष, दो साल से बंद सोलर पंप

गांव में पेयजल संकट गंभीर है। सोलर पंप पिछले दो वर्षों से खराब पड़ा है। मरम्मत के लिए ले जाने के बाद अब तक उसे वापस नहीं लगाया गया, जिससे ग्रामीणों को पानी के लिए जूझना पड़ रहा है।

नल-जल और शौचालय योजना फेल

ग्रामीणों ने बताया कि नल-जल योजना के तहत लगे नलों में पानी नहीं आता और अधिकांश शौचालय उपयोग में नहीं हैं। इससे साफ है कि योजनाएं धरातल पर प्रभावी नहीं हो पाई हैं।

मुख्यधारा में लौटे, पर पहचान नहीं

पूर्व नक्सली मड़कम भीमा ने बताया कि आत्मसमर्पण के बाद भी उसे आधार कार्ड और वोटर आईडी नहीं मिला है, जिससे वह सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित है।

चौपाल से जगी उम्मीद

दीपिका शोरी ने ग्रामीणों की सभी समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागों तक पहुंचाने और जल्द समाधान का भरोसा दिलाया।

उन्होंने कहा कि उन्हें लगातार मोबाइल के माध्यम से गांव की समस्याओं की जानकारी मिल रही थी, इसलिए वे स्वयं यहां पहुंचीं। उन्होंने भरोसा जताया कि जिले के कलेक्टर अमित कुमार और प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय संवेदनशील नेतृत्व दे रहे हैं और ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान के लिए आवश्यक कदम जल्द उठाए जाएंगे।

अब मेड़वाही के ग्रामीणों को उम्मीद है कि नक्सल साये से बाहर निकल रहा उनका गांव जल्द ही विकास की मुख्यधारा से भी जुड़ पाएगा।

Rajdhani Se Janta Tak
Author: Rajdhani Se Janta Tak

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