श्री संकल्प छत्तीसगढ़ संकल्प हॉस्पिटल छुरा, जाँच टीम क़े साथ स्वास्थ्य विभाग पर संदेह क़े घेरे मे, क्या बिना परमिशन क़े icu क़े संचालन मिलीभगत तो नही
गरियाबंद/छुरा -: संवाददाता
जिले के छुरा स्थित श्री संकल्प छत्तीसगढ़ मिशन हॉस्पिटल एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में है। आयुष्मान भारत योजना के तहत करोड़ों रुपए के कथित फर्जीवाड़े, बिना अनुमति ICU संचालन, और गंभीर मरीजों के इलाज में लापरवाही जैसे आरोपों ने स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
बिना अनुमति ICU, फिर भी करोड़ों का क्लेम!
आरोपों के मुताबिक अस्पताल को ICU और HDU संचालन की आधिकारिक अनुमति फरवरी 2026 में दी गई, जिसकी पुष्टि जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने भी की है। लेकिन इससे पहले—नवंबर, दिसंबर और जनवरी माह में—आयुष्मान योजना के तहत ICU के नाम पर बड़े पैमाने पर क्लेम उठाने की बात सामने आ रही है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब ICU की अनुमति ही नहीं थी, तो:
क्या मरीजों को ICU में भर्ती दिखाकर फर्जी क्लेम किया गया?
क्या बिना अनुमति गंभीर मरीजों का इलाज किया गया?
क्या इन मामलों में हुई मौतों के लिए अस्पताल प्रबंधन जिम्मेदार है?
फर्जी डॉक्यूमेंट और क्लेम प्रक्रिया में हेरफेर
सूत्रों और शिकायतों के अनुसार अस्पताल में एक सुनियोजित तरीके से घोटाला किया गया:
पहले मरीज को सामान्य वार्ड में भर्ती किया जाता था
बाद में ICU में शिफ्ट दिखाकर क्लेम बढ़ाया जाता था
क्यूरी आने पर फर्जी ICU चार्ट तैयार कर पोर्टल पर अपलोड किया जाता था
अब सवाल उठ रहा है कि क्या स्वास्थ्य विभाग HAM पोर्टल के डेटा के आधार पर इन दावों की गहराई से जांच करेगा?
गंभीर मरीजों के नाम पर ‘फर्जी ICU ब्लॉकिंग’
एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें उड़ीसा के एक हेड इंजरी मरीज को न्यूमोनिया बताकर ICU में भर्ती दिखाया गया।
हैरानी की बात यह है कि उसी मरीज को CT स्कैन के लिए करीब 50 किलोमीटर दूर ले जाया गया।
यदि मरीज वास्तव में ICU में था, तो:
उसे बाहर कैसे ले जाया गया?
क्या ICU केवल कागजों में ही चल रहा था?
डॉक्टरों और प्रबंधन पर फिर की मांग
इस पूरे मामले में अस्पताल संचालक और संबंधित डॉक्टर—
डॉ. धीरज साहनी और डॉ. नाग—पर सीधे आरोप लग रहे हैं।
जनता और सामाजिक संगठनों की मांग है:
संबंधित डॉक्टरों और प्रबंधन पर FIR दर्ज हो
अस्पताल को ब्लैकलिस्ट किया जाए
गंभीर लापरवाही के चलते अस्पताल को सील किया जाए
मौतों का हिसाब कौन देगा?
सबसे संवेदनशील सवाल उन मरीजों को लेकर है, जिनकी मौतें ICU अनुमति मिलने से पहले हुईं।
यदि अस्पताल में ICU की सुविधा वैध रूप से मौजूद नहीं थी, तो:
गंभीर मरीजों को भर्ती क्यों किया गया?
क्या उन्हें समय पर रेफर नहीं किया गया?
क्या इन मौतों के लिए अस्पताल जिम्मेदार नहीं है?
प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पर भी सवाल
यह मामला केवल अस्पताल तक सीमित नहीं है।
अब सवाल स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी उठ रहे हैं:
“क्या इतने बड़े स्तर पर फर्जीवाड़ा बिना विभागीय मिलीभगत के संभव है?”
क्या विभाग ने समय-समय पर निरीक्षण किया?
क्या HAM पोर्टल के डेटा की मॉनिटरिंग हुई?
यदि गड़बड़ी पहले से थी, तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
उच्चस्तरीय जांच की मांग तेज
पूरा मामला अब सिर्फ अनियमितता नहीं, बल्कि सरकार की महत्वाकांक्षी आयुष्मान योजना के साथ गंभीर धोखाधड़ी के रूप में देखा जा रहा है।
जनता की मांग है कि:
उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच कराई जाए
दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो
पूरे घोटाले के मास्टरमाइंड तक पहुंचकर जवाबदेही तय की जाए
बड़ा सवाल
क्या स्वास्थ्य विभाग इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर पाएगा?
क्या दोषियों पर FIR, अस्पताल पर कार्रवाई और पीड़ितों को न्याय मिलेगा?
Author: Rajdhani Se Janta Tak
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