इंदौर में सोयाबीन रिसर्च का नया मॉडल, मीडिया दल ने देखा किसानों की आय बढ़ाने का रास्ता

इंदौर/रायपुर:- मध्यप्रदेश प्रवास पर पहुंचे छत्तीसगढ़ के 14 सदस्यीय मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने अपने अध्ययन दौरे के दूसरे दिन आईसीएआर–भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान का विस्तृत भ्रमण किया। इस दौरान पत्रकारों ने सोयाबीन अनुसंधान, नई तकनीकों और किसानों की आय बढ़ाने के लिए किए जा रहे नवाचारों को नजदीक से समझा और परखा।

संस्थान में विशेषज्ञों ने मीडिया दल को सोयाबीन की उन्नत किस्मों, उत्पादन तकनीकों और मूल्य संवर्धन की पूरी प्रक्रिया की जानकारी दी। विशेष रूप से सोया दूध, सोया पनीर और अन्य उत्पादों के निर्माण की आधुनिक तकनीकों का प्रदर्शन किया गया। पत्रकारों ने देखा कि किस तरह कम लागत में सोयाबीन से विविध उत्पाद तैयार कर किसानों और युवाओं के लिए नए आय स्रोत विकसित किए जा सकते हैं।

संस्थान के निदेशक डॉ. कुंवर हरेंद्र सिंह ने चर्चा के दौरान बताया कि संस्थान का उद्देश्य केवल अधिक उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों को बेहतर बाजार और वैल्यू एडिशन के माध्यम से अधिक लाभ दिलाना भी है। उन्होंने कहा कि “हम सोयाबीन की ऐसी किस्में विकसित कर रहे हैं जो अधिक उत्पादन देने के साथ-साथ सूखा और प्रतिकूल परिस्थितियों को भी सहन कर सकें। साथ ही, हम किसानों को प्रोसेसिंग और मार्केटिंग से जोड़कर उनकी आय में वास्तविक वृद्धि लाने का प्रयास कर रहे हैं।”

भ्रमण का प्रमुख आकर्षण संस्थान का अत्याधुनिक इनक्यूबेशन सेंटर रहा, जहां नए उद्यमियों और स्टार्टअप्स को तकनीकी मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। यहां युवाओं को सोया आधारित उद्योग स्थापित करने के लिए ‘टेक्नोलॉजी ट्रांसफर’ के माध्यम से पूरी सहायता दी जाती है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिल रहा है।

संस्थान के वैज्ञानिकों ने बताया कि वर्ष 1987 में स्थापित यह केंद्र देश में सोयाबीन अनुसंधान का प्रमुख संस्थान है। हाल के वर्षों में एनआरसी 136, एनआरसी 131 और एनआरसी 157 जैसी उच्च उत्पादकता वाली और सूखा-सहनशील किस्मों का विकास किया गया है, जो किसानों के लिए काफी लाभकारी साबित हो रही हैं। इन किस्मों से उत्पादन में वृद्धि के साथ जोखिम भी कम हो रहा है।

मीडिया दल ने संस्थान के कार्यों और उपलब्धियों की सराहना करते हुए इसे तिलहन उत्पादन बढ़ाने और किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने की दिशा में अहम पहल बताया। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने कहा कि इस तरह के नवाचार और तकनीकी सहयोग मॉडल को अन्य राज्यों में भी लागू किया जाना चाहिए। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ के विभिन्न मीडिया संस्थानों के पत्रकारों का यह दल छह दिवसीय अध्ययन यात्रा पर है, जिसके तहत वे केंद्र सरकार की योजनाओं, कृषि नवाचारों और औद्योगिक विकास के विभिन्न मॉडल्स का अध्ययन कर रहे हैं, ताकि इन जानकारियों को आम जनता तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सके।

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