छुईखदान विकासखंड में लाल ईंट का अवैध साम्राज्य वनों की लकड़ी से धधकते भट्ठे
दीनदयाल यदु/जिला ब्यूरो चीफ
छुईखदान == पर्वत श्रृंखलाओं और घने जंगलों से घिरा छुईखदान विकासखंड आज अवैध लाल ईंट कारोबार की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है। पूरे क्षेत्र में सैकड़ों अवैध ईंट भट्ठे धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं, लेकिन हैरत की बात यह है कि जिम्मेदार विभागों की ओर से कोई ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही।
*सबसे बड़ा सवाल —ईंट पकाने की लकड़ी आ कहां से रही है?*
ईंट भट्ठों में दिन-रात जल रही आग के लिए जिस जलाऊ लकड़ी का उपयोग हो रहा है, वह सीधे-सीधे जंगलों की अंधाधुंध कटाई की ओर इशारा कर रही है। पूरे विकासखंड का आसमान लाल ईंट के धुएं से ढंका हुआ है।
*कहां-कहां धड़ल्ले से चल रहा अवैध निर्माण*
छुईखदान–गंडई सड़क से लेकर महाराटोला, भोरमपुर, घिरघोली, बाईकटोरी, नवागांव, बीरूटोला, घोघरे, छिंदारी, कानीमेरा, सिलपट्टी, साखा, कोर्राय, हाथबंजा, विचारपुर, उदयपुर से आगे अतरिया बाजार रोड तक
अवैध ईंट निर्माण और खुलेआम बिक्री की चर्चा आम है।
चौंकाने वाली बात यह है कि कई स्थानों पर जंगल के भीतर ही ईंट बनाई जा रही है, और फिर शहरों में बेची जा रही है।
*वन क्षेत्र में भट्ठे—क्या विभाग को जानकारी नहीं?*
जिस इलाके में ईंट भट्ठे चल रहे हैं, वह सीधे वन विभाग के अधिकार क्षेत्र में आता है।
फिर सवाल उठता है—
क्या वन विभाग की जानकारी के बिना लकड़ी की कटाई संभव है? या फिर यह सब किसी बड़े संरक्षण का नतीजा है?
*कार्रवाई या सिर्फ ‘सेटिंग’?*
पिछले वर्ष कुछ भट्ठों पर हुई कार्रवाई को लेकर आज भी “सेटिंग की बू” महसूस की जा रही है।
लाखों की लागत से चल रहे बड़े भट्ठों पर कार्रवाई का कोई ठोस परिणाम आज तक सामने नहीं आया। चर्चा है कि रसूखदार भट्ठा संचालकों को बचा लिया गया। प्रतिबंध के बावजूद लाल ईंट का खुलेआम उपयोग
राज्य शासन द्वारा शासकीय निर्माण कार्यों में लाल ईंट के उपयोग पर प्रतिबंध है, इसके बावजूद— 1. प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बन रहे मकानों में खुलेआम लाल ईंटों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
क्या शासनादेश सिर्फ कागजों तक सीमित रह गया है?
*छोटी कार्रवाई, बड़ा खेल जारी*
हाल ही में लाल ईंट के भंडारण पर हुई कार्रवाई के बाद अब यह चर्चा तेज है कि—छोटे मामलों में दिखावटी कार्रवाई और बड़े और संगठित अवैध कारोबार को जानबूझकर नजरअंदाज
किया जा रहा है।
*जनता पूछ रही है तीखे सवाल*
यदि ईंट भट्ठे अवैध हैं, तो बड़े भट्ठों पर ताला क्यों नहीं?और यदि वैध हैं, तो वन कानून और शासनादेश किसके लिए?
क्या प्रशासन ने लाल ईंट माफिया को खुली छूट दे रखी है? क्या कानून के रखवाले ही माफिया के साथ खड़े नजर आ रहे हैं?
*राजनीतिक विस्फोट कीआहट*
विश्वस्त सूत्रों के अनुसार कुछ विभागीय कर्मचारियों का क्षेत्र में भ्रमण हुआ, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई अब तक नजर नहीं आई।
ऐसे में अवैध ईंट निर्माण को लेकर संरक्षण की आशंका और गहराती जा रही है।
यदि समय रहते निष्पक्ष और सख्त जांच नहीं हुई, तो यह मामला आने वाले दिनों में सिर्फ प्रशासनिक नहीं बल्कि एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।




