जिला प्रमुख नवीन दांदडें
सुकमा, 6 अप्रैल।आज ही के दिन 6 अप्रैल 2010 को छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग (तत्कालीन दंतेवाड़ा जिला) के ताड़मेटला क्षेत्र में हुआ नक्सली हमला भारतीय सुरक्षा इतिहास के सबसे दर्दनाक और साहसिक घटनाओं में से एक माना जाता है। इस भीषण हमले में 76 जवानों ने मातृभूमि की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए थे।
यह घटना केवल एक हमला नहीं, बल्कि वीरता, त्याग और देशभक्ति की अद्भुत मिसाल बन गई। घने जंगलों के बीच घात लगाकर किए गए इस हमले में जवानों ने अंतिम सांस तक डटकर मुकाबला किया। उन्होंने न तो पीछे हटने का विचार किया और न ही हार मानी — उनका एक ही लक्ष्य था, देश की रक्षा।
शहीद जवानों की वर्दी भले ही खून से लाल हो गई, लेकिन उनका साहस और बलिदान आज भी तिरंगे की तरह ऊंचा लहरा रहा है। हर साल यह दिन हमें उन वीर सपूतों की याद दिलाता है, जिन्होंने हमारी सुरक्षा के लिए अपना सर्वस्व अर्पित कर दिया।
आज, पूरे देश और विशेषकर बस्तर अंचल में उन 76 अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की जा रही है। लोगों की आंखें नम हैं, लेकिन सीना गर्व से चौड़ा है।
स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि शहीदों के बलिदान और सुरक्षा बलों के सतत प्रयासों के कारण आज बस्तर क्षेत्र नक्सलवाद के प्रभाव से काफी हद तक मुक्त हो चुका है और विकास की नई राह पर अग्रसर है।
उन 76 वीर शहीदों को शत-शत नमन।
आपका बलिदान हमेशा देश को प्रेरित करता रहेगा।
Author: Rajdhani Se Janta Tak
राजधानी से जनता तक न्यूज वेबसाइट के आलावा दैनिक अखबार, यूटयूब चैनल के माध्यम से भी लोगो तक तमाम छोटी बड़ी खबरो निष्पक्ष रूप से सेवा पहुंचाती है




