दही गांव (बंद पारा)आंगनबाड़ी केंद्र -02 में 17 साल से आंगनबाड़ी केंद्र अभाव में कार्यकर्ता सामुदायिक भवन में कर रही है कक्षा संचालित …!!!

गरियाबंद – देवभोग विकास खण्ड के अंतर्गत ग्राम दही गांव में आंगनबाड़ी केंद्र 02 की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता आंगनबाड़ी केंद्र के अभाव में सामुदायिक भवन में कक्षा संचालित कर रही है। ग्रामीणों का कहना है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिका दोनों का सेवा काल लगभग 17 साल से अधिक होने को जा रहा है, किंतु आज दिन पर्यन्त तक आंगनबाड़ी भवन बन पाया है, जिससे आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बच्चों को सामुदायिक भवन में कक्षा संचालित कर रही है।

भवन के लिए लिखित माध्यम से विभाग को जानकारी दी गई है, लेकिन अभी तक शासन -प्रशासन द्वारा आंगनबाड़ी भवन स्वीकृत नहीं किया जा रहा है। बंद पारा के मोहल्ले वासियों ने कहा कि आंगनबाड़ी का सेवाकालीन आज से सत्रह साल करीब हो चुकें हैं। फिर भी शासन प्रशासन द्वारा आंगनबाड़ी भवन का निर्माण नहीं किया गया है। हमारे बच्चे सामुदायिक भवन में बैठ कर पढ़ते हैं, और सामुदायिक भवन भी अधिक जर्जर हो गया है। बारिश में छत लिंकेज होने से पानी कमरे के अंदर भर जाती है। बच्चे ठीक ढंग से बैठ कर पढ़ लिख नहीं सकते। सामुदायिक भवन का निर्माण हुआ कम-से-कम तीस वर्ष से भी अधिक हो रही है। इस भवन में सबसे पहले शिक्षा गारंटी शिक्षक ने मोहल्ले के बच्चे को आठ दस साल पढ़ाया । उसके बाद जब महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा बंद पारा में आंगनबाड़ी केंद्र संचालित की जा रही है,तो भवन विहिन के वजह से सामुदायिक भवन में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सीलेन्द्री बाई प्रधान। दिलीप प्रधान कक्षा संचालित कर रही है। सामुदायिक भवन का हुआ निर्माण समयावधि अधिक वर्ष हो चुके है, इसी लिए जर्जर छतें पापड़ी निकल रही है, ऐसा न हो कि बच्चे भवन के अंदर बैठे रहे और पापड़ी किसी बच्चे के ऊपर गिर न जाए, और कोई बड़ा हादसा हो, इसी कारण मोहल्ले के लोग अपने बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्र में पढ़ने के लिए भेजना पसंद नहीं कर रहे हैं। चूंकि सामुदायिक भवन जर्जर को देखकर सभी ग्रामीण चिंतित हैं। और यदि भेज भी रहे हैं तो बहुत डर -डर के भेज रहे हैं।

इसी लिए सभी ग्रामीणजन शासन -प्रशासन से गुहार लगाई है,कि अपने दही गांव ( बंद पारा) में आंगनबाड़ी भवन का निर्माण किया जाना अत्यंत आवश्यक है। ताकि हमारे बाल बच्चे सुव्यवस्थित ढंग से शिक्षा प्राप्त कर सकें। और आंगनबाड़ी चिंता से मुक्त होकर बच्चों को खेल ,व पाठ्य पुस्तकें शिक्षा अध्यापन करने में निपुण हो।

Prakash Jaiswal
Author: Prakash Jaiswal

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