पत्रकार -:थनेश्वर बंजारे

गरियाबंद-:धर्म नगरी कहे जाने वाले उरमाल गांव से सामने आए एक सनसनीखेज मामले ने पूरे जिले में प्रशासनिक कार्यप्रणाली, नैतिक जिम्मेदारी और महिला सम्मान को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उड़ीसा की तथाकथित “ओपेरा” कलाकार, जो सनी लियोन के नाम से प्रचारित की गई—निशा महाराणा—द्वारा खुलेआम अश्लील अवस्था में अश्लील नृत्य करवाए जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही मामला तूल पकड़ गया।
जानकारी के अनुसार, इस ओपेरा कार्यक्रम के लिए 27 तारीख को एसडीएम स्तर से अनुमति दी गई थी। अनुमति के तहत यह आयोजन 5 जनवरी से 11 जनवरी तक कुल 6 दिनों तक चलना था। लेकिन कार्यक्रम के दौरान हुए अश्लील नृत्य के वीडियो जब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए, तब पुलिस और प्रशासन हरकत में आया और आयोजन को बीच में ही बंद कर दिया गया।
एसडीएम खुद रहे मौजूद, वीडियो बनाने का आरोप
इस पूरे मामले का सबसे गंभीर पहलू यह है कि जिस कार्यक्रम को अनुमति दी गई थी, उसी कार्यक्रम में अनुमति देने वाले अधिकारी—एसडीएम डॉ. तुलसीदास कुमार—मौजूद पाए गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, एसडीएम कार्यक्रम स्थल पर बैठे नजर आए और मोबाइल से वीडियो बनाते भी देखे गए।रातभर चले इस कार्यक्रम में दर्शकों ने जमकर पैसा उड़ाया। प्रवेश के लिए 200 से 400 रुपये तक टिकट वसूले गए, वहीं नृत्यांगना को कथित तौर पर एक रात के लिए 60 हजार रुपये का भुगतान तय था।
कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति?
मामले के उजागर होने के बाद कार्रवाई के तहत दो पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच किया गया, जिन पर मंच पर कलाकार के साथ अभद्र व्यवहार के आरोप लगे। वहीं आयोजन समिति के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया गया, लेकिन महज दो घंटे में उन्हें जमानत मिल जाना भी कई सवाल खड़े कर रहा है।
क्या इतनी हल्की कार्रवाई से इस तरह की अश्लीलता पर अंकुश लगाया जा सकता है?
एसडीएम ने अपने बचाव में क्या कहा
इस पूरे प्रकरण पर एसडीएम डॉ. तुलसीदास कुमार ने अपने पक्ष में सफाई देते हुए कहा कि उन्हें अश्लील नृत्य की सूचना मिली थी, जिसके बाद वे स्वयं मौके पर पहुंचे। उन्होंने कहा,“हम कार्यक्रम बंद करवाने के उद्देश्य से वहां गए थे। वास्तविक स्थिति देखने के बाद तुरंत आयोजन को रोक दिया गया। किसी भी तरह की अश्लीलता को प्रशासन का समर्थन नहीं है।”
हालांकि, सवाल यह उठता है कि यदि कार्यक्रम के प्रचार-प्रसार के लिए “उड़ीसा की सनी लियोन” के नाम से वीडियो मैसेज पहले से गांव-गांव और सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे थे, तो प्रशासन ने समय रहते इस पर रोक क्यों नहीं लगाई?
महिला सम्मान और प्रशासनिक निगरानी पर सवाल
एक ओर सरकार महिला सुरक्षा, सम्मान और सशक्तिकरण की बात करती है, वहीं दूसरी ओर ऐसे आयोजनों को सरकारी अनुमति मिलना और जिम्मेदार अधिकारियों की मौजूदगी प्रशासन की भूमिका को कठघरे में खड़ा करती है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब अश्लीलता के गवाह खुद जिम्मेदार अधिकारी बनेंगे, तो क्षेत्र में महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान का भविष्य क्या होगा?
फिलहाल मामला जांच के दायरे में है, लेकिन गरियाबंद प्रशासन की भूमिका को लेकर उठे ये सवाल अब ठोस जवाब मांग रहे हैं।
Author: Rajdhani Se Janta Tak
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