जिला प्रमुख नवीन दांदडें
सुकमा। छत्तीसगढ़ विधानसभा द्वारा पारित धर्म स्वातंत्र्य (संशोधन) विधेयक 2026 का प्रदेशभर में स्वागत हो रहा है। छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की सदस्य दीपिका शोरी ने इस विधेयक को सामाजिक संतुलन, सांस्कृतिक संरक्षण और विशेष रूप से महिलाओं की सुरक्षा की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया है।
उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और राज्य सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि लंबे समय से समाज के कमजोर वर्गों—खासकर महिलाओं और नाबालिगों—को प्रलोभन, दबाव और भ्रम के जरिए धर्मांतरण का शिकार बनाया जा रहा था। यह विधेयक ऐसी गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
दीपिका शोरी ने बताया कि नए कानून के तहत धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया को पारदर्शी और विधिसम्मत बनाया गया है। अब किसी भी धर्मांतरण से पहले संबंधित पक्षों को अधिकृत अधिकारी को पूर्व सूचना देना अनिवार्य होगा। इसके बाद सार्वजनिक सूचना जारी कर निर्धारित समयसीमा में उसका परीक्षण किया जाएगा, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि धर्म परिवर्तन किसी दबाव, लालच या धोखाधड़ी के तहत न हो।
उन्होंने आगे बताया कि विधेयक में अवैध धर्मांतरण के मामलों में 7 से 10 वर्ष तक की सख्त सजा का प्रावधान है, जबकि पुनरावृत्ति की स्थिति में आजीवन कारावास तक की सजा दी जा सकती है। महिलाओं, नाबालिगों और अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के खिलाफ जबरन धर्मांतरण पर और भी कठोर दंड एवं भारी जुर्माने का प्रावधान इसे और प्रभावी बनाता है।
दीपिका शोरी ने कहा कि विवाह के बहाने या सामूहिक रूप से किए जाने वाले धर्मांतरण समाज में असंतुलन और अशांति पैदा करते हैं, ऐसे में यह विधेयक इन कृत्यों पर अंकुश लगाने में एक सशक्त कदम साबित होगा।
उन्होंने मुख्यमंत्री के उस दृष्टिकोण की सराहना की, जिसमें इस कानून को सामाजिक सौहार्द, पारदर्शिता और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा से जोड़ा गया है। अंत में उन्होंने प्रदेशवासियों को हिंदू नववर्ष और चैत्र नवरात्रि की शुभकामनाएं देते हुए प्रदेश की सुख-समृद्धि और शांति की कामना की।
Author: Rajdhani Se Janta Tak
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