जिला प्रमुख नवीन दांदडें
सुकमा – बस्तर के सुदूर अंचलों में शिक्षा की अलख जगाने के लिए जिला प्रशासन अब केवल योजनाओं और बैठकों तक सीमित नहीं है, बल्कि सीधे गांवों तक पहुंचकर बच्चों का भविष्य संवारने में जुटा है। इसी कड़ी में सुकमा कलेक्टर अमित कुमार के हालिया दौरे के दौरान एक भावुक और प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई, जिसने संवेदनशील प्रशासन का मानवीय चेहरा उजागर कर दिया।
खेतों के बीच रुका काफिला, जागा भविष्य
गुरुवार को कलेक्टर मारोकी, मानकापाल, परिया और कुचारास जैसे दूरस्थ गांवों के दौरे पर थे। इसी दौरान उनकी नजर सड़क किनारे भीषण गर्मी में महुआ बीनती एक छोटी बच्ची पर पड़ी। कलेक्टर ने तुरंत अपना काफिला रुकवाया और खेतों के बीच पेड़ के पास पहुंचकर बच्ची से आत्मीयता से बात की।
बातचीत में बच्ची ने अपना नाम मड़कामी मंगली बताया। जब कलेक्टर ने उससे स्कूल न जाने का कारण पूछा, तो अभाव और परिस्थितियों की एक सच्चाई सामने आई—जिसके चलते वह पढ़ाई से दूर हो गई थी।
“महुआ बीनने वाले हाथ कलम थामेंगे”
कलेक्टर अमित कुमार ने कहा कि प्रशासन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी बच्चा संसाधनों या जागरूकता के अभाव में शिक्षा की मुख्यधारा से बाहर न रहे।
उन्होंने कहा, “जब महुआ बीनने वाले हाथ कलम थामेंगे, तभी सुकमा का असली विकास होगा।”
उन्होंने बताया कि जिले में लगातार पालक-शिक्षक बैठकें आयोजित की जा रही हैं और शिक्षक भी ड्रॉप-आउट बच्चों के घर-घर जाकर पालकों को शिक्षा के महत्व के बारे में समझा रहे हैं।
चौपाल नहीं, सीधे घर तक पहुंची सरकार
प्रशासन की संवेदनशीलता तब और स्पष्ट हुई जब कलेक्टर केवल बातचीत कर आगे नहीं बढ़े, बल्कि मंगली के माता-पिता से मिलने सीधे उसके घर पहुंच गए।
संवाद और संवेदनशीलता: उन्होंने पालकों को समझाया कि शिक्षा ही बच्चों का भविष्य बदलने का सबसे मजबूत माध्यम है।
समस्या का समाधान: कलेक्टर ने पूछा कि बच्चे को स्कूल भेजने में उन्हें क्या दिक्कतें आ रही हैं।
सकारात्मक परिणाम: कलेक्टर की आत्मीय समझाइश का असर हुआ और मंगली के माता-पिता उसे तुरंत स्कूल भेजने के लिए तैयार हो गए।
मौके पर ही दिए दाखिले के निर्देश
कलेक्टर अमित कुमार ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने बीआरसी को निर्देशित किया कि मंगली के साथ वहां मौजूद एक अन्य बालक माड़वी देवा का भी नियमित स्कूल जाना सुनिश्चित किया जाए और दोनों को आवासीय विद्यालय में भर्ती कराया जाए।

इस दौरान जिला पंचायत सीईओ मुकुंद ठाकुर भी मौजूद रहे।
प्रशासन के इस जमीनी और मानवीय प्रयास की पूरे क्षेत्र में सराहना हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि जब अधिकारी खुद गांवों तक पहुंचकर बच्चों को पढ़ाने की पहल करते हैं, तो यह पूरे समाज के लिए प्रेरणा बन जाती है।
Author: Rajdhani Se Janta Tak
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