राजधानी से जनता तक/ योगेन्द्र राठौर
Hasdeo Blood Center, चांपा में मानवता, संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी की एक प्रेरणादायक मिसाल देखने को मिली, जब डिलीवरी के दौरान एक मरीज को तत्काल रक्त की आवश्यकता पड़ी। कठिन परिस्थिति में समय रहते आगे आकर प्रवीण राठौर और योगेन्द्र राठौर ने रक्तदान कर एक परिवार के चेहरे पर मुस्कान लौटा दी।
प्रसव के दौरान मरीज की स्थिति गंभीर होने लगी थी और डॉक्टरों ने तुरंत रक्त की आवश्यकता बताई। जैसे ही यह सूचना मिली, बिना किसी संकोच और देर के दोनों युवाओं ने रक्तदान के लिए सहमति दी। रक्तदान की इस पहल ने न केवल एक मरीज की जान बचाने में मदद की, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि समाज में आज भी मानवता जिंदा है।
रक्तदान के समय वहां मौजूद लोगों ने दोनों युवाओं की सराहना की। डॉक्टरों ने बताया कि डिलीवरी केस में समय पर रक्त मिलना अत्यंत आवश्यक होता है, क्योंकि थोड़ी सी देरी भी बड़ी समस्या बन सकती है। ऐसे समय में स्वेच्छा से रक्तदान करना वास्तव में “महादान” है।
इस पुनीत कार्य में उनके साथ प्रियांश राठौर, दीपक राठौर, हिमांशु राठौर, रोशन राठौर शुभम राठौर और तुषार राठौर भी मौजूद रहे। भले ही उन्होंने रक्तदान नहीं किया, लेकिन पूरे समय साथ रहकर सहयोग और हौसला बढ़ाया। टीम भावना और सामाजिक एकजुटता की यह तस्वीर समाज के लिए एक सकारात्मक संदेश है।
स्थानीय नागरिकों ने कहा कि आज के युवाओं को ऐसे कार्यों से प्रेरणा लेनी चाहिए। रक्तदान करने से न केवल किसी की जान बचती है, बल्कि यह समाज में आपसी सहयोग और भाईचारे की भावना को भी मजबूत करता है।
यह घटना साबित करती है कि जब युवा आगे आते हैं, तो हर संकट का समाधान संभव है। प्रवीण राठौर और योगेन्द्र राठौर का यह सराहनीय कदम आने वाले समय में अन्य लोगों को भी रक्तदान के लिए प्रेरित करेगा।
रक्तदान ही सच्चा मानव धर्म है – और आज इन युवाओं ने इसे चरितार्थ कर दिखाया।
Author: Rajdhani Se Janta Tak
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