बड़ी खबर: गरियाबंद में अवैध रेत उत्खनन का ‘सुनियोजित खेल’ – पंचायत को दरकिनार कर रेत माफिया कर रहे मनमानी, प्रशासन खामोश

क्या किसी मंत्री-विधायक के संरक्षण में चल रहा है अवैध रेत कारोबार?

गरियाबंद, छत्तीसगढ़ / गरियाबंद जिले में इन दिनों रेत माफिया बेलगाम हो चुके हैं। पूरी तरह से वैध रेत खदानें बंद होने के बावजूद जिले में खुलेआम रेत उत्खनन और परिवहन का कार्य जारी है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह सब बिना ग्राम पंचायत की अनुमति के हो रहा है। पंचायतें लगातार विरोध और शिकायत कर रही हैं, मगर प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारी अब तक मौन हैं।

ग्राम पंचायत सिंधौरी सहित कई पंचायतों ने अपने आधिकारिक लेटरपैड पर स्पष्ट तौर पर उल्लेख किया है कि उनके क्षेत्र की नदियों से अवैध रेत उत्खनन और परिवहन किया जा रहा है। ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि जब तक पंचायत की अनुमति न हो, तब तक यह काम संभव ही नहीं। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या यह सारा खेल किसी राजनीतिक संरक्षण में हो रहा है?

किसके इशारे पर हो रहा है यह खेल?

स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह अवैध कारोबार किसी मंत्री, विधायक या उनके करीबी लोगों के इशारे पर चल रहा है। रेत माफिया खुलेआम नदियों से रेत निकालकर बेच रहे हैं, जबकि जिले में एक भी वैध रेत खदान नहीं है। ऐसे में यह स्पष्ट होता है कि शासन-प्रशासन की चुप्पी खुद एक बड़ा सवाल बन गई है।

प्रशासनिक तंत्र भी सवालों के घेरे में

खनिज विभाग और जिला प्रशासन की निष्क्रियता इस पूरे मामले को और भी संदिग्ध बना रही है। सवाल यह है कि जब पंचायतें शिकायत कर रही हैं, ज्ञापन सौंप रही हैं, तब अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या ऊपर से दबाव है? क्या खनिज अधिकारी भी इस खेल का हिस्सा बन चुके हैं?

पंचायतों की बिना अनुमति रेत उत्खनन नहीं हो सकता। बावजूद इसके गांवों में रेत ट्रैक्टरों से ढोने वाले जो आवास के लिए ले जा रहे होते है उन पर कार्यवाही करते है.और बड़े पैमाने पर होने वाले रेत खनन परिवहन पर पुलिस, राजस्व विभाग,खनिज विभाग सब मूकदर्शक बने हुए हैं। कुछ दिनों पहले पितईबंध पंचायत में समस्त पंच और सरपंचों ने मिलकर अवैध रेत खनन पर रोक लगाने की मांग करते हुए ज्ञापन भी सौंपा था।

शराब दुकानों के लिए मांगी अनुमति, रेत खनन में पंचायत की दरकिनार

भाजपा सरकार के आने के बाद 67 नई शराब दुकानों को खोलने की योजना के तहत पंचायतों से प्रस्ताव मांगे गए थे। वहां तो पंचायत की अनुमति आवश्यक मानी गई, लेकिन अवैध रेत खनन जैसे बड़े मुद्दे में पंचायतों की आवाज को क्यों अनसुना किया जा रहा है?

अब सवाल ये हैं

क्या मंत्री-विधायक के संरक्षण में चल रहा है अवैध रेत कारोबार?

खनिज विभाग और जिला प्रशासन क्यों नहीं कर रहा कोई कार्रवाई?

पंचायत की अनुमति के बिना कैसे हो रहा है खनन?

क्या यह भ्रष्टाचार की जड़ें ज़िले में गहराती जा रही हैं?

 

अब देखना यह है कि क्या जिला प्रशासन इस पर संज्ञान लेगा या फिर यह मामला भी बाकी मामलों की तरह दबा दिया जाएगा। जनता जवाब चाहती है और अब कार्रवाई की मांग हर पंचायत से उठने लगी है।

Rajdhani Se Janta Tak
Author: Rajdhani Se Janta Tak

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