बस्तर की धरोहर, दीदियों के हाथ: ‘बस्तर पंडुम’ में घुला छिंदगढ़ की परंपराओं का मीठा स्वाद

25 से अधिक पारंपरिक पेय बने आकर्षण का केंद्र, संस्कृति संरक्षण की नई बयार

जिला प्रमुख नवीन दांदडें 

सुकमा – बस्तर की माटी की सुगंध, आदिम परंपराओं की गरिमा और लोकसंस्कृति का उत्सव — ‘बस्तर पंडुम’ आज संभाग स्तर पर सांस्कृतिक पहचान का भव्य मंच बन गया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में आयोजित यह आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि बस्तर की आत्मा को सहेजने और संजोने का एक भावनात्मक प्रयास है।

इस भव्य आयोजन में सुकमा जिले के छिंदगढ़ विकासखंड की दीदियों ने पारंपरिक पेय पदार्थों के माध्यम से बस्तर की समृद्ध विरासत को जीवंत कर दिया है। किंदरवाड़ा पंचायत की स्व-सहायता समूह की 7 दीदियां अपने आकर्षक स्टॉल के साथ पूरे पंडुम की शान बनी हुई हैं।

स्वाद में बसी परंपरा: 25 से अधिक पारंपरिक पेय का संगम

स्टॉल पर बस्तर की परंपरागत जीवनशैली की झलक साफ दिखाई देती है। यहाँ मड़िया पेज, चापड़ा आमट, लान्दा, ताड़ी, सल्फी और छिंदरस जैसे पारंपरिक पेय लोगों को सहज ही अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं।

स्टॉल की प्रमुख पेशकश :

🔹 औषधीय एवं शीतल पेय — तिखुर शरबत, कोदो-कुटकी पेज, सुरम

🔹 पारंपरिक स्वाद — चाऊर लाई पाना, धान लाई पाना, चटपटी चापड़ा चटनी

🔹 सांस्कृतिक प्रतीक — महुआ और पसिया जैसे दुर्लभ पेय

इन पारंपरिक स्वादों ने स्थानीय नागरिकों के साथ-साथ बाहर से आए पर्यटकों को भी बस्तर की संस्कृति से जोड़ दिया है।

दीदियों के चेहरों पर गर्व, मुख्यमंत्री के प्रति आभार

कार्यक्रम में भाग ले रहीं रीना बेलसरिया, ज्योतिका नाग, मंजू बघेल एवं स्मृति बघेल के लिए यह मंच केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि सम्मान और स्वाभिमान का प्रतीक बन गया है। समूह की सदस्य ज्योतिका नाग ने भावुक होकर कहा —

“यहाँ आकर हमें बेहद गर्व महसूस हो रहा है। शासन द्वारा हमारे ठहरने एवं भोजन की बेहतरीन व्यवस्था की गई है। अपनी संस्कृति को इस तरह सम्मानित होते देख मन प्रसन्न हो जाता है। इस पहल के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का हृदय से आभार व्यक्त करते हैं।”

संस्कृति संरक्षण और आत्मनिर्भरता की मजबूत पहल

‘बस्तर पंडुम’ के माध्यम से बस्तर की लोकसंस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाने के साथ-साथ स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी एक सशक्त कदम बढ़ाया गया है।

Rajdhani Se Janta Tak
Author: Rajdhani Se Janta Tak

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