भारतीय जनता पार्टी का 46 वां स्थापना दिवस भारतीय लोकतंत्र सशक्त लंबी संघर्ष समर्पण और संगठनात्मक शक्ति को स्मरण दिवस मनाया

राजधानी से जनता तक/चरण सिंह क्षेत्रपाल

गरियाबंद – भारतीय जनता पार्टी के 46 वें स्थापना दिवस, 6 अप्रैल 1980 को हुआ था, इस अवसर पर गरियाबंद जिले में बीजेपी पदाधिकारियों व वरिष्ठ कार्यकर्ताओं ने अपने-अपने घरों, सार्वजनिक स्थलों व बीजेपी दफ्तरों में कमल फूल छाप का झंडा फहराया।6 अप्रैल केवल एक तिथि नहीं है, बल्कि भारतीय लोकतंत्र में एक सशक्त वैचारिक यात्रा का प्रतीक है। यह दिन उस लंबे संघर्ष समर्पण और संगठनात्मक शक्ति का स्मरण कराता है। भाजपा विश्व में सबसे बड़ी राजनीतिक संगठनों में स्थापित हुआ है। भाजपा की वैचारिक प्रेरणा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से प्राप्त हुई है, जिसने समाज जीवन में अनुशासन, संगठन और राष्ट्रीय भक्ति की भावना को सशक्त बनाया। इसी विचारधारा की नींव पर डा श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने भारतीय जनसंघ की स्थापना की। आगे चलकर पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने एकात्म मानववाद के माध्यम से
इसे दार्शनिक आधार दिया, भारत देश के तात्कालिक प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जैसे दूरदर्शी नेताओं ने इसे जन-जन तक पहुंचाया। वर्ष 1980 में भारतीय जनता पार्टी का गठन केवल एक ही राजनीतिक दल के रूप में नहीं अपितु एक परिपक्व वैचारिक धारा के रूप में हुआ। प्रारंभिक संघर्षों और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद भी पार्टी ने अपने मूल सिद्धांतों से कम समझौता नहीं किया। आपातकाल के दौरान लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए खड़ा होना इसकी प्रतिबद्धतता का सबसे बड़ा प्रमाण है।समय के साथ भाजपा का संगठन निरंतर विस्तृत हुआ और आज यह देश के हर राज्य,हर वर्ग और बूथ स्तर तक अपनी पकड़ मजबूत स्थिति में खडा हो रहा है। भाजपा की सबसे बड़ी विशेषता यह रही है कि उसने हमेशा संगठन को सत्ता के ऊपर रखा है। प्रधानमंत्री मंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पिछले एक दशक में पार्टी को नई दिशा और गति मिली है।

लक्ष्य अंत्योदय सुशासन का सूर्योदय

भाजपा की मूल आत्मा सांस्कृतिक राष्ट्रवाद, एक भारत श्रेष्ठ भारत और अंत्योदय के विचार में निहित है। समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना ही पार्टी का मूल उद्देश्य है। इसी सकारात्मक सोच के तहत केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं ने करोड़ों लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। अनुच्छेद 370 का उन्मूलन, अयोध्या में श्रीराम मंदिर का निर्माण, काशी विश्वनाथ का पुनर्विकास ,आंतक वाद के खिलाफ कठोर नीति, महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए कानून निर्माण, तथा नई शिक्षा नीति जैसे भाजपा की स्पष्ट वैचारिक दिशा को दर्शाती हैं।

सांस्कृतिक पुनरूत्थान के 46 साल

इतिहास साक्षी है,1980 के ऐतिहासिक अधिवेशन का,जब महाप्राण अटल बिहारी वाजपेयी ने गरजते हुए कहा था कि अंधेरा छूटेगा,सूरज निकलेगा, कमल खिलेगा। दो सांसदों वाली पार्टी से शुरू हुआ यह सफर आज विश्व के सबसे बड़े राजनीतिक संगठन के रूप में स्थापित है। आज देश के लोकमान्य प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत सांस्कृतिक पुनरूद्धार और आत्मनिर्भरता के स्वर्णिम युग में हैं।

Rajdhani Se Janta Tak
Author: Rajdhani Se Janta Tak

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