जिला प्रमुख नवीन दांदडें
सुकमा | विशेष रिपोर्ट
कभी नक्सलवाद का गढ़ रहा सुकमा जिले का मिनपा गांव आज बदलाव, विश्वास और विकास की नई इबारत लिख रहा है। मार्च 2020 की वह दर्दनाक घटना, जिसमें 17 सुरक्षाकर्मियों ने देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया, अब इतिहास बन चुकी है। उसी शहादत की धरती पर आज शांति, सुरक्षा और विकास का नया सूरज उग चुका है।
बंदूक से खेती तक का सफर

मिनपा, जो कभी भय और असुरक्षा का प्रतीक था, अब आत्मनिर्भरता और खुशहाली की ओर तेजी से बढ़ रहा है। ग्रामीणों के हाथों में अब हथियार नहीं, बल्कि खेती के औजार हैं। वनाधिकार पट्टों ने उन्हें जमीन का मालिक बनाया और समर्थन मूल्य पर धान खरीदी ने उनकी आय को मजबूत किया।
गांव में ही स्वास्थ्य सुविधाएं
पहले जहां छोटी-छोटी बीमारियों के इलाज के लिए ग्रामीणों को चिंतागुफा और दोरनापाल जाना पड़ता था, अब गांव में ही उपस्वास्थ्य केंद्र संचालित है।
मुफ्त दवाएं
त्वरित उपचार
बाइक एंबुलेंस सुविधा
इन सेवाओं ने ग्रामीणों को राहत दी है और स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ बनाया है।
डिजिटल क्रांति की दस्तक
मिनपा अब डिजिटल इंडिया की राह पर भी आगे बढ़ रहा है। गांव में आधार केंद्र खुलने से अब ग्रामीणों को दस्तावेज़ों के लिए शहर नहीं जाना पड़ता।
आधार अपडेट
राशन कार्ड
जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र
वोटर आईडी
सभी सेवाएं गांव में ही उपलब्ध हैं।
शिक्षा और पोषण का उजाला
गांव के स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र अब पूरी तरह सक्रिय हैं। बच्चों के हाथों में किताब और कलम है, जो सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य की नींव रख रहे हैं।
बिजली और राशन की मजबूती
नया पीडीएस भवन बनने से नियमित राशन वितरण सुनिश्चित हुआ है। वहीं, गांव में बिजली पहुंचने से अंधेरे का दौर खत्म हो रहा है। अब मिनपा की रातें भी रोशन होने लगी हैं।
सरकारी योजनाओं से बदली जिंदगी
मिनपा निवासी माड़वी सुक्का की कहानी इस बदलाव की मिसाल है।
2 हेक्टेयर वनाधिकार पट्टा
धान की खेती से आय में वृद्धि
समर्थन मूल्य पर धान विक्रय
प्रधानमंत्री आवास योजना से पक्का घर
इसके साथ ही आधार, राशन, आयुष्मान और पैन कार्ड जैसी सुविधाओं ने उन्हें आत्मनिर्भर बना दिया है।
प्रशासन का संकल्प, विकास की रफ्तार
कलेक्टर श्री अमित कुमार के नेतृत्व में प्रशासन ने मिनपा में विकास को नई दिशा दी है। उनका कहना है कि नक्सलवाद के खात्मे के साथ-साथ दूरस्थ क्षेत्रों तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाना ही प्राथमिकता है।
मिनपा: बदलाव की नई पहचान
मिनपा अब सिर्फ एक गांव नहीं, बल्कि बस्तर के बदलते स्वरूप की पहचान बन चुका है। जहां कभी गोलियों की गूंज थी, वहां अब बच्चों की किलकारियां सुनाई देती हैं।
यह कहानी है डर से विश्वास तक, संघर्ष से सफलता तक और अंधेरे से उजाले तक के सफर की।
Author: Rajdhani Se Janta Tak
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