राजधानी से जनता तक/ चरण सिंह क्षेत्रपाल

गरियाबंद/गोहरापदर – बिरसा मुंडा की जयन्ती पर शासकीय नवीन महाविद्यालय गोहरापदर में 26 नवम्बर 2025 को जनजातीय गौरव दिवस’ मनाया गया।
भारत सरकार द्वारा हर 15 नवम्बर को बिरसा मुंडा की जयंती के उपलक्ष्य एवं बहादुर आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृति को समर्पित ‘जनजातीय गौरव दिवस’ के रूप में घोषित किया गया है।
बिरसा मुण्डा (15 नवम्बर 1875 – 9 जून 1900) एक भारतीय आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी और मुंडा जनजाति के लोक नायक थे। उन्होंने ब्रिटिश राज के दौरान 19वीं शताब्दी के अंत में बंगाल प्रेसीडेंसी (अब झारखंड) में हुए एक आदिवासी धार्मिक सहस्राब्दी आंदोलन का नेतृत्व किया, जिससे वह भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में एक महत्वपूर्ण व्यक्ति बन गए। भारत के आदिवासी उन्हें भगवान मानते हैं और ‘धरती आबा’ के नाम से भी जाना जाता है।
कार्यक्रम की शुरूआत अतिथियों द्वारा धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा जी की छाया चित्र पर पुष्प माला अर्पित कर तथा आदिवासियों के बलिदान को याद करते हुए उन्हें नमन किये जिसमें प्रमुख रूप से कार्यक्रम की मुख्य वक्ता माननीय अभिमन्यु ध्रुव जी, महाविद्यालय जनभागीदारी अध्यक्ष श्री तानसिंह मांझी, महाविद्यालय प्राचार्य डॉ टी एस सोनवानी, भाजपा जिला उपाध्यक्ष गुरुनारायण तिवारी, हलमन सिंह ध्रुवा, चंद्रप्रकाश साहू, प्रकाश कश्यप, क्षितिजनारायण तिवारी,रंजन यादव, महाविद्यालय के समस्त सहायक प्राध्यापक अतिथि प्राध्यापक व महाविद्यालय के समस्त छात्र छात्राओं की उपस्थिति रही।
मुख्य वक्ता माननीय अभिमन्यु ध्रुव ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान भारत भूमि पर ऐसे कई नायक पैदा हुई जिन्होंने इतिहास में अपना नाम स्वर्ण अक्षरों से लिखवाया। एक छोटी सी आवाज को नारा बनने में देर नहीं लगती, बस दम उस आवाज को उठाने वाले में होना चाहिए और इसकी जीती जागती मिसाल थे बिरसा मुंडा। कहते हैं न कि जीवन लम्बा न सही लेकिन प्रभावशाली होना चाहिए; कुछ ऐसा ही प्रभाव था बिरसा मुंडा का, जिसने उन्हें आम इंसान से भगवान बना दिया। बिरसा मुण्डा के छोटे से पच्चीस वर्षीय जीवन को अनुपम कहा। भावपूर्ण नमन करते हुए कहा कि ऐसे व्यक्तित्व अपनी जाति, क्षेत्र अथवा देश के नहीं होते। वे तो पूरे विश्व के लिए अनुकरणीय होते हैं। बिरसा मुंडा ने बिहार और झारखंड की जन जातियों की स्वतन्त्रता, उनके विकास और भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में अहम रोल निभाया। अपने कार्य और आंदोलन की विजय से उन्होंने पारंपरिक भू-व्यवस्था को बदलने का बीड़ा उठाया। सामाजिक जीवन में एक आदर्श प्रस्तुत किया और नैतिक आचरण की शुद्धता, आत्म सुधार के संदेश दिये।
महाविद्यालय जनभागीदारी अध्यक्ष तानसिंह मांझी ने छात्र छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा भगवान बिरसा मुंडा जैसे सेवाभावी और संघर्षशील बने चाहे आप में से कोई शिक्षक बने या डॉक्टर, पटवारी बने या इंजीनियर, तहसीलदार बने या कलेक्टर ,जनता के लिए सेवक है अति स्वार्थ के बिना अपनी जिम्मेदारी को ईमानदारी से निभायेंगे तभी आपकी मेहनत और संघर्ष फलीभूत होंगी
भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा के प्रदेश कार्यसमिति सदस्य व महाविद्यालय जनभागीदारी समिति सदस्य हलमन सिंह ध्रुवा ने कहा अपनी जल ,जंगल और ज़मीन की रक्षा के लिए उलगुलान का आह्वान हुआ, बिरसा मुंडा के साथ हुज़ूम शामिल हुआ जो बिरसा के एक इशारें पर मरने और मारने को तैयार थे। 15 नवंबर को ही ‘जनजातीय गौरव दिवस’ को मनाया जाना सिर्फ एक संयोग नहीं है बल्कि बिरसा मुंडा और उनके जैसे कई आदिवासी क्रांतिकारियों को सम्मान देने की पहल है जो शायद बहुत पहले शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन हुई 15 नवंबर 2021 से।
अन्त में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ॰ टी एस सोनवानी ने इस जनजातीय गौरव दिवस को सफल बनाने के लिए उपस्थित मुख्य अतिथि, मुख्य वक्ता, महाविद्यालय जनभागीदारी अध्यक्ष स्टाफ के सभी सदस्यों व छात्र-छात्राओं का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में संचालन महाविद्यालय के सहायक प्राध्यापक महेन्द्र साहू ने किया।
Author: Rajdhani Se Janta Tak
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