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सुकमा/ देश के सुदूर और आदिवासी बहुल क्षेत्र के युवाओं के लिए राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए), पुणे का दर्शन एक स्वप्न से कम नहीं होता। इसी स्वप्न को हकीकत में बदलते हुए, स्वामी विवेकानंद शिक्षा प्रोत्साहन योजना के तहत एक ऐतिहासिक पहल की गई। इस योजना के अंतर्गत, छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले से 25 और बीजापुर जिले से 23 प्रतिभाशाली विद्यार्थियों सहित कुल 48 छात्र-छात्राओं के एक दल ने देश के सर्वोच्च सैन्य प्रशिक्षण संस्थान की भव्यता का अनुभव किया।
एनडीए की ‘पासिंग आउट परेड’ का बना ऐतिहासिक क्षण
इन 48 प्रतिभाशाली युवाओं को 26 नवंबर को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय रक्षा अकादमी की प्रतिष्ठित ‘पासिंग आउट परेड’ का प्रत्यक्ष साक्षी बनने का पहला और ऐतिहासिक अवसर मिला। यह परेड 3 साल के कठोर और अनुशासित सैन्य प्रशिक्षण को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद कैडेटों के भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना में अधिकारी बनने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम का प्रतीक है। इस भव्य समारोह में, जहां राष्ट्र के भविष्य के सैन्य नेतृत्व को सलामी दी गई, वहीं इन दूरस्थ क्षेत्रों के छात्रों ने सीधे तौर पर भारतीय सैन्य गौरव और अनुशासन की शक्ति को महसूस किया। परेड के बाद, कैडेट आगे के विशिष्ट प्रशिक्षण के लिए अपनी-अपनी सैन्य अकादमियों में प्रस्थान करते हैं।
राष्ट्र सेवा के प्रति जुनून पैदा करने की दिशा में बड़ा कदम
यह पहल कई मायनों में अभूतपूर्व है। यह पहली बार है जब सुकमा और बीजापुर जैसे नक्सल प्रभावित और दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों को देश के सर्वोच्च सैन्य प्रशिक्षण संस्थान के इतने महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक समारोह का हिस्सा बनने का अवसर मिला है। यह ऐतिहासिक भ्रमण शिक्षा और शौर्य के मिलन को दर्शाता है, जो इन युवा छात्रों के जीवन में एक अविस्मरणीय छाप छोड़ेगा।
Author: Rajdhani Se Janta Tak
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