राजधानी से जनता तक कोरबा | (संगम दुबे) |

कोरबा जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत एक बार फिर सवालों के घेरे में है। चूइया ग्राम पंचायत में संचालित उप-स्वास्थ्य केंद्र पर स्वास्थ्यकर्मियों की मनमानी के चलते मरीजों को बिना इलाज लौटना पड़ा। सुबह करीब 9 बजे इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचे एक परिवार को तब निराशा हाथ लगी, जब अस्पताल के मुख्य द्वार पर ताला लटका मिला।
बताया जा रहा है कि उप-स्वास्थ्य केंद्र में तीन कर्मचारी—सीएचओ यामिनी जायसवाल, आरएचओ जितेंद्र सोनकर और सोमनाथ साहू—पदस्थ हैं, इसके बावजूद केंद्र समय पर नहीं खुला।
एक परिवार अपने बीमार बच्चे को लेकर आया था, वहीं एक बुजुर्ग भी स्वास्थ्य समस्या के कारण पहुंचे, लेकिन घंटों इंतजार के बाद भी कोई कर्मचारी नहीं मिला। सुबह के 11 बजे तक केंद्र में ताला लटकता दिखा।
नियमों के अनुसार, उप-स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ कर्मचारियों की उपस्थिति अनिवार्य होती है ताकि आपात स्थिति में ग्रामीणों को तत्काल प्राथमिक उपचार मिल सके। लेकिन यहां नियमों की अनदेखी साफ नजर आई। ग्रामीणों का आरोप है कि कर्मचारियों की लापरवाही और गैर-जिम्मेदाराना रवैये का खामियाजा गरीब और जरूरतमंद मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की जांच कर जिम्मेदार स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी मरीज की जान इस तरह की लापरवाही से खतरे में न पड़े।
Author: Rajdhani Se Janta Tak
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