डीईओ द्वारा जारी पत्र में केवल आठवीं तक ही क्लास लगाने की सशर्त परमिशन
निर्माणाधीन बिल्डिंग में लग रही छोटे बच्चों की क्लास
राजधानी से जनता तक । रायगढ़ । शिक्षा अब व्यापार का एक जरिया बनकर रह गई है। सरकारी स्कूलों में अध्यापन के गिरते स्तर की वजह से निजी स्कूलों ने शिक्षण व्यवस्था को हाइजैक कर लिया है। हर साल नए-नए स्कूलों की स्थापना होती जा रही है। कमियां होने के बावजूद शिक्षा विभाग स्कूलों को संचालन की छूट देता है। ऐसा ही कुछ चैतन्य टेक्नो स्कूल के साथ है। डीईओ के पत्र में आठवीं तक सशर्त कक्षा संचालन की अनुमति दी गई है लेकिन यहां नौंवी तक एडमिशन लिए जा रहे हैं।
सरकार का पूरा फोकस सरकारी स्कूलों में सुविधाओं पर हो गया है। जबकि अध्यापन का स्तर लगातार गिरता जा रहा है। इसकी वजह शिक्षकों का स्तरहीन होना है। अब बच्चों को समय के साथ चलने लायक बनाने वाली शिक्षा सरकारी स्कूलों से नदारद है। जैसे-तैसे स्कूल चलाए जा रहे हैं। इन हालात को अवसर की तरह निजी स्कूलों ने लपका है। साल दर साल नए-नए स्कूलों का पर्दापण रायगढ़ जिले में होता जा रहा है। पहले जहां निजी स्कूलों को उंगलियों पर गिना जा सकता था, अब ये गली-कूचों तक में खुल गए हैं। कई बड़े स्कूल चेन भी रायगढ़ में एंट्री ले चुके हैं। प्राइवेट स्कूलों के बीच ज्यादा से ज्यादा बच्चों के एडमिशन को लेकर कंपीटिशन चल रहा है तो वहीं फीस भी आसमान छूने लगी है।
ऐसे निजी स्कूलों को कदम जमाने में शिक्षा विभाग भी खुलकर मदद करता है। कई कमियां होने के बावजूद निजी स्कूलों को मान्यता देने में देरी नहीं की जाती। ऐसा ही एक स्कूल चैतन्य टेक्नो स्कूल गढ़उमरिया में है। यह कांशीराम चौक से कुछ दूरी पर स्थित है। जब स्कूल की पड़ताल की गई तो जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा 30 जून 2023 को जारी एक पत्र दिखाया गया जिसमें आठवीं तक कक्षाएं लगाने की सशर्त अनुमति दी गई है। लेकिन वहां पूछने पर पता चला कि नौंवी तक एडमिशन लिए जा रहे हैं। पहली कक्षा की कुल फीस 50 हजार रुपए है। वहीं नौंवी की फीस 65 हजार रुपए सालाना है। पुस्तकें, यूनिफॉर्म सब अलग से है।
सवाल यह है कि स्कूल प्रबंधन कैसे आठवीं तक अनुमति लेकर नौैंवीं तक संचालन कर रहा है। स्कूल का डाइस कोड भी नहीं आया है। डीईओ द्वारा जारी अनुमति में एक बिंदु यह भी है जिसमें कहा गया है कि कोई शर्त का उल्लंघन होने पर अनुमति निरस्त मानी जाएगी। स्कूल में प्राचार्य डी श्रुति ने बताया कि वे नौंवी तक कक्षाएं संचालित कर रहे हैं। नौंवी की फीस 65 हजार रुपए है। कुछ प्रक्रिया अभी चल रही है।
खतरे के साए में लग रही कक्षाएं
स्कूल प्रबंधन ने पालकों को अंधेरे में रखकर बच्चों के एडमिशन करवाए हैं। फिलहाल यहां करीब 155 बच्चे अध्ययनरत हैं। स्कूल के ग्राउंड फ्लोर का काम भी अधूरा है। ऊपर के फ्लोर पर लगातार निर्माण कार्य चल रहा है। कई जगहों पर निर्माण सामग्री डंप है। एक तरह से खतरे के साए में बच्चों की पढ़ाई चल रही है। स्कूल बिल्डिंग का काम पूरा होने के पहले ही शिक्षा विभाग ने अनुमति दे दी है। जून 2023 के पहले डीईओ ने जिनको निरीक्षण के लिए भेजा था, क्या उन्होंने निर्माण की वास्तविक स्थिति नहीं देखी थी। तब तो ग्राउंड फ्लोर की छत ढलाई ही हो सकी थी। कोई क्लासरूम रेडी नहीं था लेकिन डीईओ बी बाखला ने अनुमति दे दी।

Author: Rajdhani Se Janta Tak
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