राजधानी से जनता तक । रायगढ़ । सन सिटी में करीब आठ एकड़ में डेवलप हो रही कॉलोनी को लेकर कई परतों में रहस्य उजागर हो रहे हैं। अब जानकारी मिल रही है कि पुराने त्रुटिपूर्ण दस्तावेजों के आधार पर कॉलोनी विकास अनुज्ञा दे दी गई। एनओसी को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। सन सिटी के कॉलोनाइजर कमल सांवड़िया ने 2014 में मिले लाइसेंस पर 25 मई 2022 को रेरा एप्रूवल लिया गया। जबकि बिल्डर लाइसेंस की अनुमति 2019 में ही एक्सपायर हो चुकी है। लेआउट भी उसी समय का लगाया गया था जबकि काम अलम नक्शे पर किया जा रहा है। ग्राम पंचायत कलमी में सन सिटी नामक प्राइवेट कॉलोनी बन रही है। इसके लिए ली गई एनओसी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। लेआउट और विकास अनुमति के पहले पीडब्ल्यूडी, एनएच, इरीगेशन, उद्योग विभाग, विद्युत विभाग आदि से एनओसी लेनी होती है।
प्रमोटर ने 4 सितंबर 2015 को खसरा नंबर 179/2 रकबा 0.190 हे., खनं 180 रकबा 0.567 हे., खनं 182/1 रकबा 0.547 हे., खनं 182/2 रकबा 0.587 हे., खनं 182/3 रकबा 0.966 हे., खनं 184/4 रकबा 0.925 हे. कुल रकबा 3.235 हे. का डायवर्सन कराया था। बिल्डर लाइसेंस 18 जून 2014 को तत्कालीन एसडीएम ने दिया था। कॉलोनी से बीस मीटर में ही रेलवे लाइन है। कॉलोनी के अंदर ही बिजली टावर है। हाईटेंशन लाइन बीच से गुजरी है। सवाल यह है कि कैसे कॉलोनी के लिए विद्युत विभाग ने एनओसी दे दी। रेलवे से भी एनओसी लेनी चाहिए थी।
रेरा पंजीयन निरस्त, बिक्री नकल नहीं मिल सकती
सन सिटी को 25 मई 2022 को रेरा एप्रूवल मिला है जिसकी वैधता 31 दिसंबर 2022 तक थी। यह एप्रूवल खत्म हो चुका है। लेकिन कॉलोनाइजर ने रेरा एक्ट का भी मजाक उड़ाया है। अधिकारियों ने अनुमति देकर कई गलतियां की हैं। अब इसकी जांच की जा रही है।

Author: Rajdhani Se Janta Tak
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