छत्तीसगढ़ राज्य के ग्रामीण वनांचल क्षेत्रों में हरा सोना कहलाने वाला तेंदूपत्ता का कार्य कुछ दिनों बाद शुरुआत होगी

राजधानी से जनता तक । गरियाबंद । चरण सिंह क्षेत्रपाल । छत्तीसगढ़ राज्य सरकार द्वारा वनांचल ग्रामीण क्षेत्रों में तेंदूपत्ता संग्राहकों का समर्थन मूल्य में वृद्धि कि गई है। और इनके साथ वनांचल में उपजे हुए घरेलू उपयोगी अन्य वस्तुएं हैं। लघु वनोपज सहकारी समिति द्वारा तालिका बोर्ड में दर्शाया गया है जो इस प्रकार है- तेंदूपत्ता सीजन वर्ष -2024 में -5500/ – प्रति मानक बोरा किया गया है। चिरौंजी गुठलियां ग्रेड 1 -350/- प्रति किलो, ग्रेड 2- 270/- प्रति किलो, ग्रेड 3- 190/- प्रति किलोशहद – 225/- प्रति किलो, महुआ फूल ( सुखा) – 30/- प्रति किलो , महुआ बीज – 29/- प्रति किलो।

तो इस तरह से छत्तीसगढ़ शासन द्वारा निर्धारित किया गया समर्थन मूल्य को लघु वनोपज सहकारी समिति अपने तेंदूपत्ता संग्रहण केन्द्र के सूचना पटल पर जानकारी चस्पा किया गया है। चुकी निर्धारित दरें में बढ़ोतरी हुई है, जिससे वनांचलो में बदलाव आ सकता है। सबसे अधिक संख्या में तेंदूपत्ता का व्यापार से वनांचल के ग्रामीण महिलाओं, पुरूषों व वयस्क युवक- युवतियों को रोजगार मिलती हैं। राज्य शासन द्वारा जारी किए गए समर्थन मूल्य को लेकर मजदूर व्यक्ति भारी उत्साहित है।

वनाश्रितों का कहना है कि, जंगल की उपज ही हमारी आय का एक मात्र साधन है। इनमें तेंदूपत्ता सबसे अधिक आय उपलब्ध होती हैं। किंतु हमें तेंदूपत्ता एकत्र करने में कई मुसीबतों से गुजरना पड़ता है।जब तेंदूपत्ता एकत्र कर बेचीं जाती है तो इसके उचित दाम भी नहीं मिल पाते है। अब छत्तीसगढ़ शासन ने तेंदूपत्ता संग्राहकों कि समस्या को सुझबुझ कर तेंदूपत्ता का समर्थन मूल्य 5500/- ₹ प्रति मानक बोरा किया गया है। तेंदूपत्ता समर्थन मूल्य निर्धारित किए जाने से वनांचलो में बदलाव आने की संभावना है। ग्रामीण क्षेत्रों में गरीब लोगों की आर्थिक स्थिति ठीक होगी साथ ही आजिविका के साधन भी बेहतर होगा।

बड़ी आमदनी का जरिया तेंदूपत्ता

गरियाबंद जिले के वनांचल ग्रामों में निवासी बताते हैं कि जंगलों के बीच निवासरत लोगों के लिए तेंदूपत्ता ही आमदनी का बड़ा जरिया बन गया है। पत्ते की तोड़ाई से लेकर बंडल बनाने का काम सभी परिवार के साथ मिलकर करते हैं। पहले दाम कम मिल रहा था जिसके कारण अधिकांश लोग तेंदूपत्ता एकत्र करने में रुचि नहीं रखते थे। लेकिन अभी वर्तमान शासन के द्वारा तेंदूपत्ता समर्थन मूल्य 5500/- हजार रुपए प्रति मानक बोरा बढ़ोत्तरी कि गई है।जिससे देखकर वनांचल के सभी ग्रामीण महिलाएं व पुरुषों ने तेंदूपत्ता एकत्र करने लिए आपस में एक दूसरे बातचीत कर रहे है। कहा जाता है कि हरा सोना कहलाने वाला तेंदूपत्ता वाकई में सोना जैसे ही है।

तेंदूपत्ता संग्राहकों के मेहनत को मिला मान

वर्तमान छत्तीसगढ़ शासन द्वारा तेंदूपत्ता संग्राहकों कि आर्थिक मजबूती देने के साथ उनकी मेहनत को लेकर 5500/-हजार रूपए प्रति मानक बोरा किया गया है। जिससे उनकी मेहनत का मान बढ़ाया गया है। तेंदूपत्ते से आय जंगल क्षेत्र के निवासियों को काफी राहत मिलती हैं।1500/- बढ़ोतरी होने से अब कुछ पैसे भविष्य के लिए बचाई जा सकती है। वरना ऐसा था कि पैसा बचते ही नहीं थे। मेहनत भी ज्यादा लगती है।

शासन द्वारा सराहनीय निर्णय

वनांचल के ग्रामीणों कि आर्थिक स्थिति अब मजबूत होगी, चुकी छत्तीसगढ़ सरकार कि गारंटी के तहत प्रदेश के जितने भी तेंदूपत्ता एकत्रित करने वाले हैं संग्राहक है अब उन्हें सही समर्थन मूल्य पर भुगतान किया जाएगा। तेंदूपत्ता संग्राहकों को सरकार द्वारा लागू कि गई हर सुख सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएगी। इस तरह भौतिक परिस्थितियों में राज्य सरकार का फैसला सराहनीय है। क्यों कि इसमें वनांचल के लोगों का हित होगा।

Rajdhani Se Janta Tak
Author: Rajdhani Se Janta Tak

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