गरियाबंद /
फिंगेश्वर-: प्रथम पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री अमितेश शुक्ल जी नें छुरा के छत्तीसगढ़ संकल्प हॉस्पीटल में हुए घटना के पीड़िता से उनके घर जाकर मुलाक़ात किया। आदिवासी पीड़ित महिला नीरा बाई कमार के भाई उगेश कमार से पूरी घटना की जानकारी लेकर गरियाबंद कलेक्टर से फोन से बात करके घटना को संज्ञान में लेकिन दोषियों के ऊपर कार्यवाई करने कहा।
अमितेश शुक्ल जी नें कहा की यह बड़ी ही दुखत घटना है छुरा के छत्तीसगढ़ संकल्प हॉस्पिटल के डॉक्टरो की लापरवाही के चलते आदिवासी महिला के पेट में पल रहे शिशु की मौत हो जाती है और परिजनों को न्याय के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। घटना को एक हप्ते से ज्यादा हो गया है फिर भी शासन प्रशासन मौन है, हॉस्पिटल और दोषियों के ऊपर अभी तक कोई कार्यवाई नहीं किया जा रहा है। जाँच समिति बनाकर शासन प्रशासन खानापूर्ति कर दोषियों को बचाने का काम कर रही है। छुरा के उसी हॉस्पिटल में पहले भी इसी तरह की घटना घट चुकी है फिर भी शासन मौन है। भाजपा शासन में क़ानून व्यवस्था इतनी चरमरा गई है की डॉक्टर के चलते गर्भवती आदिवासी महिला के पेट में पल रहे नवजात शिशु की मृत्यु हो जाती है और परिजनों को न्याय के लिए कलेक्टर जन दर्शन में आवेदन देना पड़ता है। जब महिला चेकअप के लिए गई तब डॉक्टर के साथ शिशु रोग विशेषज्ञ क्यों मौजूद नहीं थी? पेट में पल रहे शिशु के बारे में बिना सोचे समझें इंजेक्शन लगा दिया गया।
आगे अमितेश शुक्ल जी नें कहा की अगर जल्द से जल्द हॉस्पिटल और डॉक्टर के ऊपर कार्यवाई कर परिजनों को न्याय नहीं दिया जाता है तो हम धरना प्रदर्शन तथा आंदोलन करेंगें।
*अमितेश शुक्ल*
प्रथम पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री छ.ग.शासन
फिंगेश्वर-: प्रथम पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री अमितेश शुक्ल जी नें छुरा के छत्तीसगढ़ संकल्प हॉस्पीटल में हुए घटना के पीड़िता से उनके घर जाकर मुलाक़ात किया। आदिवासी पीड़ित महिला नीरा बाई कमार के भाई उगेश कमार से पूरी घटना की जानकारी लेकर गरियाबंद कलेक्टर से फोन से बात करके घटना को संज्ञान में लेकिन दोषियों के ऊपर कार्यवाई करने कहा।
अमितेश शुक्ल जी नें कहा की यह बड़ी ही दुखत घटना है छुरा के छत्तीसगढ़ संकल्प हॉस्पिटल के डॉक्टरो की लापरवाही के चलते आदिवासी महिला के पेट में पल रहे शिशु की मौत हो जाती है और परिजनों को न्याय के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। घटना को एक हप्ते से ज्यादा हो गया है फिर भी शासन प्रशासन मौन है, हॉस्पिटल और दोषियों के ऊपर अभी तक कोई कार्यवाई नहीं किया जा रहा है। जाँच समिति बनाकर शासन प्रशासन खानापूर्ति कर दोषियों को बचाने का काम कर रही है। छुरा के उसी हॉस्पिटल में पहले भी इसी तरह की घटना घट चुकी है फिर भी शासन मौन है। भाजपा शासन में क़ानून व्यवस्था इतनी चरमरा गई है की डॉक्टर के चलते गर्भवती आदिवासी महिला के पेट में पल रहे नवजात शिशु की मृत्यु हो जाती है और परिजनों को न्याय के लिए कलेक्टर जन दर्शन में आवेदन देना पड़ता है। जब महिला चेकअप के लिए गई तब डॉक्टर के साथ शिशु रोग विशेषज्ञ क्यों मौजूद नहीं थी? पेट में पल रहे शिशु के बारे में बिना सोचे समझें इंजेक्शन लगा दिया गया।
आगे अमितेश शुक्ल जी नें कहा की अगर जल्द से जल्द हॉस्पिटल और डॉक्टर के ऊपर कार्यवाई कर परिजनों को न्याय नहीं दिया जाता है तो हम धरना प्रदर्शन तथा आंदोलन करेंगें।
*अमितेश शुक्ल*
प्रथम पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री छ.ग.शासन

Author: Thaneshwar Banjare



