भरतपुर क्षेत्र में बिजली संकट गहराया, ग्रामीणों की परेशानी चरम पर, राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर

भरतपुर क्षेत्र में बिजली संकट गहराया, ग्रामीणों की परेशानी चरम पर, राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर

एमसीबी भरतपुर क्षेत्र के ग्रामीणों को इस समय बिजली संकट का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उनके जीवन में अंधकार छा गया है। लगातार बिजली कटौती और ब्लैकआउट से ग्रामीण बेहद परेशान हैं। स्थिति इतनी गंभीर है कि बारिश के मौसम में ग्रामीणों को जंगली जानवरों के बीच अंधेरी रात में अपने घरों में बैठने को मजबूर होना पड़ रहा है।

विधायक रेणुका सिंह ने कांग्रेस को ठहराया दोषी

मनेंद्रगढ़ में भारतीय जनता पार्टी के कार्यक्रम के दौरान विधायक रेणुका सिंह ने इस गंभीर समस्या का पूरा दोष कांग्रेस की पूर्व सरकार पर मढ़ दिया। उनका कहना है कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में बिजली व्यवस्था के लिए घटिया सामग्री का उपयोग किया गया, जिसके कारण आज पूरी बिजली व्यवस्था ध्वस्त हो गई है। रेणुका सिंह ने आश्वासन दिया कि उनकी सरकार जल्द ही इस समस्या का समाधान करेगी, लेकिन जनता को इस वक्त भीषण संकट का सामना करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों की नाराजगी बढ़ी, जनप्रतिनिधियों पर विश्वास टूटता

भरतपुर क्षेत्र के साथ ही जनकपुर और केल्हारी के आसपास के क्षेत्रों में भी हालात कुछ अलग नहीं हैं। बारिश के मौसम में ग्रामीणों को कई दिनों तक बिजली का इंतजार करना पड़ता है। जब वे अपनी समस्या लेकर जनप्रतिनिधियों के पास जाते हैं, तो उन्हें गोलमोल जवाब देकर टाल दिया जाता है। कांग्रेस और बीजेपी एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप करते रहते हैं, लेकिन समस्या का कोई ठोस समाधान नहीं निकलता।

पूर्व विधायक गुलाब कमरों का तंज

पूर्व विधायक गुलाब कमरों ने इस मौके पर विधायक रेणुका सिंह पर तंज कसते हुए कहा कि क्षेत्र की जनता को अब विधायक को ही लालटेन लेकर ढूंढना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के समय 80 प्रतिशत काम पहले ही हो चुका था और केवल बिजली के तार लगाना बाकी था। लेकिन मौजूदा सरकार के आते ही सब नियमों और कायदों में उलझ कर रह गया। गुलाब कमरों ने इस संकट पर सरकार की निष्क्रियता पर सवाल उठाए और जनता के लिए निरंतर आंदोलन जारी रखने की बात कही।

निष्कर्ष

भरतपुर क्षेत्र की बिजली समस्या अब सिर्फ एक प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि राजनीति का अखाड़ा बन गई है। जब तक जनप्रतिनिधि इस समस्या को हल करने के लिए गंभीरता से प्रयास नहीं करेंगे, तब तक ग्रामीणों को अंधकार में ही जीवन जीना पड़ेगा। ग्रामीणों की तकलीफों को देखकर यह साफ है कि उन्हें अब भी राहत का इंतजार है, और यह इंतजार कब खत्म होगा, यह कहना मुश्किल है।

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