कालेज के प्राचार्य डॉ नारायण झाड़ी को विदाई देने पहुँचे डिप्टी कलेक्टर गवेल।

राजधानी से जनता तक । बीजापुर । ब्यूरो:- भरत विहान दुर्गम । शासकीय शहीद वेंकटराव स्नाकोत्तर महाविद्यालय बीजापुर के प्रचार्य डॉ नारायण झाड़ी सेवानिवृत्त हुए है।जिसको लेकर बीजापुर कालेज में स्टाफ के मौजूदगी में डॉ नारायण झाड़ी एवं उनकी अर्धांगिनी को शाल और श्रीफल भेंटकर गई नम आखों से दी विदाई।कालेज के छात्रों की आंखे हुई नम,अपने चहिते प्राचार्य को विदा करते स्टॉफ भी हुए भावुक।आपको बता दे कि डॉ नारायण झाड़ी 14 साल 3 महीने तक बीजापुर कालेज में प्राचार्य के पद पर सेवा दिए है।जिसमे बीजापुर कालेज को निम्न स्तर से लेकर उच्च स्तर तक पहुंचाने में अपना जीवन समर्पित कर दिया।यही वजह है कि बीजापुर महाविद्यालय में प्राचार्य को विदा करते हुए सभी कर्मचारियों एवं विधार्थियों की आँखे हुई नम।डॉ नारायण झाड़ी अपने शासकीय सेवा की अर्द्धशतक पूर्ण करने में मात्र 2 वर्ष ही रहे गए थे।डॉ नारायण झाड़ी लगभग 47 साल नौकरी करके रिटायर्ड हुए। जिले में जब से कॉलेज का निर्माण हुआ ‘तब से लेकर आज तक पूरे 14 वर्ष तीन माह का सफर में आज तक कालेज में बेदाग रहे सिर्फ अपनी कर्तव्यों के प्रति ईमानदारी से कार्य की वजह से कभी संस्था के ऊपर किसी भी तरह की दाग लगने नही दिए।जिसकी लोग तारीफ की मिशाल देते है।

उनकी उपलब्धियां देखी जाए तो उन्होंने शहिद वेंकट राव महाविद्यालय में नए टेक्निकल का लैब स्थापित किया जो छत्तीसगढ़ में पहली लेब बीजापुर में है।उन्होंने बताया उनके शुरुआती कार्यकाल के दौरान बीजापुर कॉलेज में मात्र तीन स्टाफ हुआ करता था।जिसे लेकर उन्होंने अपनी चिंता शासन प्रशासन के समक्ष व्यक्त की थी जिस पर प्रशासन ने अमल करते हुए धीरे-धीरे स्टाफ को बढ़ाया।वर्तमान में लगभग सभी विषयों के शिक्षक उपलब्ध है केवल बी० ए०, एवं बीएससी करने की व्यवस्था कराने वाला यह कॉलेज अब एम ए और एमएससी तक की पढ़ाई हो रही है। बीजापुर जिले के सुदूर क्षेत्र उसूर जैसे स्थान में जन्मे डॉ नारायण झाड़ी ने कहा मुझे अपनी पढ़ाई पूर्ण करने हेतु बहुत सी समस्याओं का सामना करना पड़ता था। उसूर से बीजापुर तक पैदल आना पड़ता था जबकि बीजापुर में किसी प्रकार की कोई सुविधा भी नहीं हुआ करती थी ना बिजली की सही व्यवस्था थी ना ही कोई लाइट हुआ करता था। उस वक्त अंधेरे में तथा दिया जलाकर उसकी रोशनी में अपनी पढ़ाई किया करते थे ना ही उचित मूल्य दुकान की कोई व्यवस्था हुआ करती थी ना ही प्राइवेट दुकान हुआ करते थे उन कठिन परिस्थितियों में पढ़ाई करना एक बड़े चट्टान को तोड़ने जैसे था।उन्होंने आगे बताया बारिश के मौसम में कभी-कभी नदी नालों में जल का स्तर जब बढ़ जाता था तब दो दो तीन-तीन दिनों तक इंतजार करना पड़ता था रास्ता पार करने हेतु अपनी आगे की शिक्षा ग्रहण करने के लिए।

उसूर से जब बीजापुर पहुंचे यही छात्रावास में रहकर अपनी पढ़ाई जारी रखा हायर सेकेंडरी की पढ़ाई बीजापुर में पूर्ण कर झाड़ी जगदलपुर की ओर रवाना हुए थे ।पढ़ाई करते-करते उनकी नौकरी लगी लिपिक के पद पर तब उन्होंने अपना पहले शासकीय नौकरी प्रारंभ किया फिर उसके पश्चात उनका सफर आगे बढ़ते बढ़ते उन्होंने अपनी पढ़ाई नहीं रोका और LLB ,एम फील तक की पढ़ाई पूर्ण की और .प्राचार्य के रूप में बीजापुर कालेज में उनको जिम्मेदारी मिली।अंत मे भावुक होते बोले इस कॉलेज की और इस कॉलेज के पूरे स्टाफ को नवनियुक्त प्राचार्य को सौंपते जा रहा हु।आप सबकी याद हमेशा आएगी।इस अवसर पर डिप्टी कलेक्टर नारायण गवेल एवं वर्तमान प्राचार्य अमन सिंग साहू एवं अन्य स्टाफ सहित डॉ नारायण झाड़ी का नातिन विहान दुर्गम भी मौजूद थे।डिप्टी कलेक्टर नारायण गबेल ने प्राचार्य के विदाई सह सम्मान समारोह में कहा कि झाड़ी सर अपने आप मे एक संस्थान है जब मैं बीजापुर आया तब विधानसभा चुनाव फिर लोकसभा चुनाव था उस दरमियान जब भी चुनाव से संबंधित प्रशिक्षण में कोई समस्या आती तो सब यह कहते झाड़ी सर देख लेंगे परन्तु मुझे यह समझ नही आता था कि ये झाड़ी सर कौन है ?फिर झाड़ी सर से परिचित हुआ फिर उनकी प्रशिक्षण ट्रेनिंग देखी तो लगा कि उनकी टीम बेहतर से बेहतर कार्य करके दिखाया जिससे हमें जो परेशानी और वजन बढ़ता, हो आसानी से कम हो गया।आप उसूर जैसे सुदूर क्षेत्र से निकलकर शिक्षा के क्षेत्र में एक शिखर ख्याति प्राप्त किया है उसकी जितनी तारीफ की जाए उतनी कम है।आज आपकी विदाई समारोह नही सर ये आपकी सम्मान समारोह है।अंत मे नव पदस्थ प्राचार्य अमन सिंह साहू ने कहा कि आपकी कमी।हमेशा रहेगी परन्तु हमे आपकी जब भी मार्गदर्शन चाहिए होगा आपको हमेशा हम याद करेंगे.आपके द्वारा किया कार्य अतुलनीय है।आपके बारे में जो जानता है वो समझ सकता है।दुर्गम क्षेत्र से निकलकर यंहा तक पहुचना वाकई काबिले तारीफ है।आपकी उज्ज्वल भविष्य की हमारी और से कामना करता हु।

Rajdhani Se Janta Tak
Author: Rajdhani Se Janta Tak

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