राजधानी से जनता तक मस्तूरी:- हज़ारों के भीड़ को संबोधित करते हुए मधुकर ने दोहे से अपना विचार को प्रारंभ किया। जहां बाबा गुरु घासीदास जी के मानव समाज के प्रति योगदान को याद करते हुए कहा कि बाबा सत्य, अहिंसा व समानता के प्रतीक थे। गुरूघासीदास बाबा ने समाज को जुआ, नशाखोरी से दूर रहने आह्वान किया था।

यदि हम बाबा के सात संदेशों को अपने जीवन में आत्मसात करें तो समाज एक और नई दिशा में जा सकता है। गुरु घासीदास ने जहां समाज में एकता बढ़ाने का कार्य किया वहीं भाईचारे और समरसता का संदेशभी दिया।

उन्होंने न सिर्फ सत्य की आराधना की, बल्कि समाज में नई जागृति पैदा करने का श्रेय भी उन्हें ही जाता है। उन्होंने युवाओं को मार्गदर्शन देते हुए बाबाजी के बताए मार्गों पर चलने प्रेरित किया। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामवासी व जनप्रतिनिधिगण उपस्थित रहे।



