जमीन धोखाधड़ी मामला: प्रो. तिवारी दंपत्ति को 3-3 वर्ष का सश्रम कारावास, पीड़ित को 25.50 लाख रुपये क्षतिपूर्ति देने का आदेश

राजधानी से जनता तक कोरबा। जमीन विक्रय के नाम पर धोखाधड़ी के एक गंभीर मामले में कोरबा न्यायालय ने परसुराम नगर, दादर निवासी प्रोफेसर सुरेशचंद्र तिवारी और उनकी पत्नी सुधा तिवारी को दोषी ठहराते हुए तीन-तीन वर्ष के कठोर कारावास एवं 20-20 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। यह निर्णय न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी श्री सत्यानंद प्रसाद की अदालत द्वारा सुनाया गया।

 

प्रकरण की शुरुआत वर्ष 2020 में हुई थी, जब बिहार सरकार के पूर्व अवर सचिव श्री जगदीश मिश्रा ने शिकायत दर्ज कराई कि तिवारी दंपत्ति ने दादरखुर्द स्थित एक भूमि को अपनी बताकर 16.50 लाख रुपये में सौदा किया था। बाद में जांच में स्पष्ट हुआ कि संबंधित भूमि उनके स्वामित्व में थी ही नहीं। जब पीड़ित ने धनवापसी की मांग की, तो उन्हें धमकी दी गई और मारपीट की गई।

मामले में शासन की ओर से जिला लोक अभियोजक श्री एस.के. मिश्रा ने सशक्त पैरवी की, जबकि बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता श्री कमलेश साहू ने पक्ष रखा। अभियोजन द्वारा प्रस्तुत ठोस साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने दोनों आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी) एवं 120बी (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत दोषसिद्ध पाया।

तीन माह में देना होगा 25.50 लाख रुपये

न्यायालय ने भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 357 के अंतर्गत पीड़ित को क्षतिपूर्ति देने का भी आदेश दिया। आदेशानुसार, तिवारी दंपत्ति को वर्ष 2013 में ली गई राशि पर वर्ष 2016 से 6% वार्षिक ब्याज जोड़ते हुए कुल 25.50 लाख रुपये की भरपाई तीन माह के भीतर करनी होगी। समयावधि में भुगतान न होने की स्थिति में यह राशि जुर्माने की तरह वसूली जाएगी।

 

 

Sangam Dubey
Author: Sangam Dubey

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