देवभोग एसडीएम कार्यालय में 12 साल तक पदस्थ लिपिक शांतनु बांधे को कलेक्टर ने किया स्थानांतरण अब भी कुर्सी में जमे हैं 

राजधानी से जनता तक/ चरण सिंह क्षेत्रपाल 

गरियाबंद-गरियाबंद जिले के देवभोग में अनुविभागीय कार्यलय में पदस्थ लिपिक शांतनु बांधे पर लंबे समय से पद पर जमे रहने और लगातार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई न होने को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बताया जा रहा है कि यह लिपिक शांतनु बांधे पिछले 12 सालों से एक ही स्थान पर पदस्थ है।

सूत्रों के मुताबिक, इनके खिलाफ कई बार जनप्रतिनिधियों, भाजपा संगठन पदाधिकारियों और स्वयं मुख्यमंत्री कार्यालय तक शिकायतें पहुंच चुकी हैं। लगातार शिकायतों के बावजूद भी अंततः जिला प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए संबंधित लिपिक को जिला कार्यालय में संलग्न करने (अटैच करने) के आदेश जारी किए थे।

लेकिन हैरानी की बात तो यह है, कि कलेक्टर के आदेश के बावजूद भी लिपिक अभी भी अपनी पुरानी कुर्सी पर जमे हुए हैं। मानो उन्हें किसी का डर ही न हो। सूत्र बताते हैं कि यह लिपिक स्थानीय प्रशासन में कलेक्टर से भी ज्यादा पावरफुल बन चुका है।

स्थानीय कर्मचारियों और विभागीय सूत्रों का कहना है कि लिपिक का एसडीएम स्तर तक गहरा गठजोड़ है, जिसके चलते प्रशासनिक आदेशों को खुलेआम अनदेखा किया जा रहा है।

जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर अब सवाल उठने लगे हैं कि आखिर क्यों एक अधिकारी को 12 साल से एक ही जगह पदस्थ रहने की अनुमति दी गई? और जब स्थानांतरण का आदेश हो चुका है, तो उसे अमल में लाने में देरी क्यों हो रही है?

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह की मनमानी से न केवल प्रशासन की छवि धूमिल होती है, बल्कि जनता के कामकाज पर भी असर पड़ता है।

अब यह देखना होगा कि जिला प्रशासन इस प्रकरण में क्या कदम उठाती है ,और क्या वास्तव में कलेक्टर के आदेश की अवहेलना करने वाले लिपिक पर कार्रवाई होती है या नहीं ?

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Author: Rajdhani Se Janta Tak

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