साल्हेवारा-छुईखदान इलाका बना खनन हॉटस्पॉट : गोपालटोला में 1217 हेक्टेयर लौह अयस्क ब्लॉक नीलाम

 

साल्हेवारा-छुईखदान क्षेत्र को छत्तीसगढ़ का उभरता हुआ खनन हॉटस्पॉट बनाने वाली श्रृंखला में एक और कड़ी जुड़ गई है। गोपालटोला लौह अयस्क ब्लॉक की ई-नीलामी एवं निविदा प्रक्रिया नवंबर में पूरी हो चुकी है, जिससे यह स्पष्ट संकेत मिल गया है कि यह क्षेत्र अब केवल संभावनाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि व्यावहारिक खनन प्रक्रिया की ओर ठोस कदम बढ़ा चुका है।

 

नचनिया, भाजीडोंगरी, जगमड़वा-हनाईबन-मरदकठ रा और संडी ब्लॉकों के बाद गोपालटोला ब्लॉक का विकास साल्हेवारा क्षेत्र की रणनीतिक महत्ता को और मजबूत करता है। खनिज संसाधन विभाग, छत्तीसगढ़ ने एमएसटीसी पोर्टल के माध्यम से गोपालटोला लौह अयस्क ब्लॉक के लिए कंपोजिट लाइसेंस की ई-नीलामी की थी। यह प्रक्रिया 10 से 19 नवंबर तक चली, जिसमें निर्धारित समय सीमा के भीतर बोली प्रक्रिया सफलतापूर्वक हो गई। नीलामी पूर्ण होने के बाद अब तकनीकी व वित्तीय मूल्यांकन, सफल बोलीदाता की औपचारिक घोषणा और आगे की वैधानिक स्वीकृति की प्रक्रिया का मार्ग

प्रशस्त हो गया है। कंपोजिट लाइसेंस की शर्तों के अनुसार अब सफल बोलीदाता कंपनी को विस्तृत खनिज अन्वेषण करना होगा। यदि इस अन्वेषण में व्यावसायिक रूप से उपयुक्त मात्रा में लौह अयस्क की पुष्टि होती है, तो वही कंपनी आगे चलकर खनन पट्टा प्राप्त करने की पात्र होगी। खनन प्रारंभकरने से पहले माइनिंग प्लान की स्वीकृति, पर्यावरणीय अनुमति, विस्फोटक लाइसेंस तथा आवश्यकता अनुसार वन और वन्यजीव स्वीकृति लेना अनिवार्य होगा। यह पूरी प्रक्रिया चरणबद्ध और नियमानुसार आगे बढ़ेगी। भौगोलिक दृष्टि से गोपालटोला ब्लॉक अनुकूल है।

 

 *एमएसटीसी के ऑक्शन प्लेटफार्म पर रखा* 

 

जिले के सहायक खनिज अधिकारी बबलू पांडे ने किया कि गोपालटोला लौह अयस्क ब्लॉक को फिलहाल एमएसटीसी के ऑक्शन प्लेटफार्म पर रखा गया है। जब तक नीलामी प्रक्रिया पूरी होकर विभाग को लिखित सूचना, एलओआई अथवा राशि जमा होने का आधिकारिक पत्र प्राप्त नहीं होता, तब तक किसी कंपनी को ब्लॉक आवंटित होने की पुष्टि नहीं की जा सकती। वर्तमान में पोर्टल के माध्यम से ही जानकारी प्राप्त हो रही है और आगे की कार्रवाई राज्य स्तर से निर्देश मिलने के बाद ही की जाएगी।

 

*तीन गांवों में फैला लौह अयस्क क्षेत्र* 

 

गोपालटोला लौह अयस्क ब्लॉक साल्हेवारा तहसील के गोपालटोला, बांसभीरा और लालपुर गांवों में फैला हुआ है। इसका कुल क्षेत्रफल 1217 हेक्टेयर है, जिसे पूर्ण रूप से खनिजयुक्त क्षेत्र माना गया है। भूविज्ञान एवं खनन निदेशालय द्वारा किए गए प्रारंभिक सर्वेक्षण में यहां जी-4 स्तर का अन्वेषण किया गया है, जो आगे के विस्तृत अध्ययन के लिए मजबूत आधार प्रदान करता है। यह जिले के सबसे बड़े ब्लाकों में शामिल है।

 

 

कुल मिलाकर नवंबर में पूरी हुई गोपालटोला लौह अयस्क ब्लॉक की नीलामी यह स्पष्ट संकेत देती है कि साल्हेवारा-छुईखदान बेल्ट अब छत्तीसगढ़ के सबसे सक्रिय और रणनीतिक खनिन क्षेत्रों में अपनी मजबूत पहचान बना चुका है। यहां एक ओर औद्योगिक और आर्थिक विकास की व्यापक संभावनाएं हैं।

Deendayal Yadu
Author: Deendayal Yadu

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