एग्रीस्टेक न बनने से वन अधिकार पट्टाधारी किसान की धान बिक्री अटकी

राजधानी से जनता तक|कोरबा| जिले के ग्राम गहनिया निवासी वन अधिकार पट्टाधारी किसान बैसाखूराम (पिता डहाकूराम), जाति मांझी को इस वर्ष धान बिक्री में गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। किसान को शासन द्वारा प्रदत्त वन अधिकार पट्टा खसरा नंबर 74/47, रकबा 0.580 हेक्टेयर भूमि पर प्रतिवर्ष धान की खेती की जाती है, जिसे समिति के माध्यम से बेचा जाता रहा है।

किसान ने बताया कि इस वर्ष भी उन्होंने उक्त भूमि में धान की फसल बोई और तैयार की है, लेकिन समिति में एग्रीस्टेक नहीं हो पाने तथा कैरी फॉरवर्ड की प्रक्रिया पूर्ण न होने के कारण धान की बिक्री नहीं हो पा रही है। इससे किसान आर्थिक संकट में फंस गया है।

पीड़ित किसान ने प्रशासन से मांग की है कि उसकी भूमि को समिति से कैरी फॉरवर्ड कराया जाए, ताकि वह अपनी उपज बेच सके और उसे मेहनत का उचित मूल्य मिल सके।

स्थानीय किसानों का कहना है कि यदि इस प्रकार की तकनीकी या प्रशासनिक बाधाओं को समय रहते दूर नहीं किया गया, तो वन अधिकार पट्टाधारी छोटे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

Sangam Dubey
Author: Sangam Dubey

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