गुरुधाम तरीघाट में श्रद्धा-साधना का महासंगम, शिव संयुजस्य स्वामी अनुराज जयंती एवं अमृत आनंद महोत्सव भव्य रूप से सम्पन्न

गरियाबंद -:गुरुधाम तरीघाट में 18 एवं 19 जनवरी को आयोजित दो दिवसीय शिव संयुजस्य स्वामी अनुराज जयंती समारोह एवं अमृत आनंद महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और गहन साधना के दिव्य वातावरण में भव्यता के साथ सम्पन्न हुआ। इस पावन आयोजन में गुरुधाम के परम संरक्षक एवं संचालक पूज्य गुरुजी डॉ. आनंद मतावले के सान्निध्य में हजारों साधक-शिष्यों एवं श्रद्धालुओं ने आध्यात्मिक ऊर्जा और आत्मिक शांति का अनुभव किया।

कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण के रूप में पूज्य गुरुजी डॉ. आनंद मतावले ने व्यासपीठ से साधक-शिष्यों को मंत्र, दीक्षा, साधना, साबर मंत्र, गुप्त नवरात्रि, बसंत पंचमी एवं नील तारा साधना जैसे गूढ़ एवं दुर्लभ आध्यात्मिक विषयों पर विस्तारपूर्वक मार्गदर्शन दिया।

उन्होंने सरल एवं ओजस्वी वाणी में साधना के वास्तविक स्वरूप, गुरु-शिष्य परंपरा की महत्ता तथा आत्मकल्याण के मार्ग को सहज रूप में समझाया।

गुरुजी ने अंतरमुखी साधना हेतु चक्र साधना का महत्व बताते हुए कहा कि “एकं ब्रह्मा सकल जगत” के भाव को समझना आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मंत्र और दीक्षा केवल शब्द या विधि नहीं, बल्कि साधक के जीवन में चेतना जागरण का सशक्त माध्यम हैं। साबर मंत्र की प्रभावशीलता पर प्रकाश डालते हुए गुरुजी ने कहा कि यह लोकजीवन से जुड़ी सरल साधना पद्धति है, जो श्रद्धा और विश्वास के साथ की जाए तो शीघ्र फलदायी होती है।

गुप्त नवरात्रि को उन्होंने अंतर्मुखी साधना और सिद्धि प्राप्ति का श्रेष्ठ काल बताया, वहीं बसंत पंचमी को ज्ञान, विवेक और नवसंकल्प का पर्व कहा। नील तारा साधना पर विशेष प्रकाश डालते हुए गुरुजी ने बताया कि यह साधना साधक को भय, भ्रम और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्त कर आध्यात्मिक उन्नति की ओर अग्रसर करती है।

प्रवचनों के दौरान मंच पर उपस्थित साधक-शिष्य गुरुजी के अमृत वचनों से भावविभोर दिखाई दिए। पूरे परिसर में मंत्रोच्चार, ध्यान और साधना की दिव्य अनुभूति व्याप्त रही। दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने भी आयोजन में सहभागिता कर गुरुजी का आशीर्वाद प्राप्त किया।

 

कार्यक्रम का समापन गुरु पूजन एवं गुरु आरती के साथ हुआ। शांति धाम साधक कल्याण समिति, राजिम तरीघाट द्वारा सभी साधक-शिष्यों एवं श्रद्धालुओं के लिए भोजन प्रसादी की उत्तम व्यवस्था की गई। अंत में आयोजकों ने सभी साधक-शिष्यों, श्रद्धालुओं एवं अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए स्वामी अनुराज के आदर्शों को आत्मसात कर उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

यह आयोजन केवल जयंती समारोह तक सीमित न रहकर आध्यात्मिक चेतना, ज्ञान जागरण और साधना की गहन अनुभूति का अनुपम संगम सिद्ध हुआ। दो दिवसीय अमृत आनंद महोत्सव की सफलता पर गुरुसत्ता आध्यात्मिक तंत्र ज्योतिष वेलफेयर सोसायटी, राजिम के संचालक-संरक्षक डॉ. आनंद मतावले गुरुजी, मां चंकेश्वरी पीठ के पुजारी रामधन जोशी, रामगुलाल साहू, चंद्रशेखर सिन्हा (मैनपुर), गिरीश गजेंद्र (बसना), राजू चंद्राकार (बागबाहरा), ओंकार साहू (गरियाबंद), तुलेंद्र सागर, टीकवेंद्र जटवार, दीनबंधु निराला (महासमुंद), भागचंद चतुर्वेदी, हेमराज साहू, सहदेव बंजारे (राजिम), लोकनाथ आंडेय, भीषलाल साहू सहित पूरे छत्तीसगढ़ से लगभग तीन हजार से अधिक साधक-शिष्य उपस्थित रहे।

Rajdhani Se Janta Tak
Author: Rajdhani Se Janta Tak

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