जिला प्रमुख नवीन दांदडें
सुकमा – जिले में नक्सल उन्मूलन की दिशा में एक बड़ी सफलता सामने आई है। जिला पुलिस सुकमा एवं अल्लूरि सीताराम राजू (आंध्रप्रदेश) पुलिस के संयुक्त प्रयासों से दक्षिण बस्तर डिविजन अंतर्गत कोंटा–किस्टाराम एरिया कमेटी में सक्रिय कुल ₹8 लाख के इनामी 04 माओवादी कैडरों ने “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” अभियान के तहत आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया है। आत्मसमर्पण करने वालों में 02 महिला माओवादी भी शामिल हैं।
दिनांक 30 जनवरी 2026 को आत्मसमर्पण कार्यक्रम बस्तर रेंज पुलिस महानिरीक्षक श्री पी. सुंदरराज (IPS), पुलिस अधीक्षक सुकमा श्री किरण चव्हाण (IPS), श्री पंकज मीणा (IPS) OSD ASR (AP), अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुकमा श्री रोहित शाह (IPS) एवं 2IC कोंटा रेंज सीआरपीएफ श्री अरविंद पी. आनंद की उपस्थिति में संपन्न हुआ।
आत्मसमर्पित माओवादी कैडरों द्वारा SLR, INSAS, .303, .315 बोर रायफल सहित ऑटोमैटिक हथियार एवं एम्युनेशन पुलिस के समक्ष जमा किए गए। ये सभी कैडर गोलापल्ली LOS कमांडर (ACM) एवं पार्टी सदस्य रैंक के हैं।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, किस्टाराम व गोलापल्ली क्षेत्रों में नवीन सुरक्षा कैम्पों की स्थापना, सड़क कनेक्टिविटी के विस्तार और लगातार प्रभावी नक्सल विरोधी अभियानों के कारण माओवादियों का स्वतंत्र विचरण क्षेत्र समाप्त हो गया है। इससे संगठन कमजोर पड़ा है और कैडरों में तेजी से मोहभंग की स्थिति बनी है।
पुलिस का कहना है कि पहले माओवादी संगठन द्वारा सुदूर अंचलों में भय का माहौल बनाकर ग्रामीणों को भ्रमित किया जाता था, लेकिन अब शासन की विकास योजनाएँ और मूलभूत सुविधाएँ अंतिम छोर तक पहुँचने से ग्रामीणों का विश्वास प्रशासन पर मजबूत हुआ है।
आत्मसमर्पण करने वाले सभी माओवादी कैडरों को छत्तीसगढ़ शासन की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत आर्थिक सहायता, पुनर्वास एवं अन्य नियमानुसार सुविधाएँ प्रदान की जाएंगी, जिससे वे सम्मानजनक और शांतिपूर्ण जीवन जी सकें।
इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक सुकमा श्री किरण चव्हाण ने शेष सक्रिय माओवादी कैडरों से अपील करते हुए कहा कि वे हिंसा का रास्ता छोड़कर शासन की पुनर्वास योजना का लाभ लें और समाज की मुख्यधारा में लौटें।
वहीं बस्तर रेंज आईजी श्री पी. सुंदरराज (IPS) ने कहा कि माओवादी संगठन अब समाप्ति की ओर है। हिंसा केवल विनाश का मार्ग है, जबकि ‘पूना मारगेम’ अभियान विकास और सम्मान का द्वार खोलता है। उन्होंने शेष कैडरों से हथियार छोड़कर शांति की राह चुनने की अपील की।
Author: Rajdhani Se Janta Tak
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