सुकमा के जनजातीय नाट्य और वेशभूषा का जलवा, मिला प्रथम पुरस्कार
गृहमंत्री श्री अमित शाह व मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने किया सम्मानित
जिला प्रमुख नवीन दांदडें
सुकमा – लाल बाग मैदान, जगदलपुर में आयोजित संभागस्तरीय ‘बस्तर पंडुम 2026’ का समापन सांस्कृतिक वैभव, उल्लास और जनजातीय गौरव के साथ संपन्न हुआ। मांदर की गूंजती थाप, घुंघरुओं की मधुर झंकार और रंग-बिरंगी पारंपरिक वेशभूषा के बीच पूरा बस्तर अपनी हजारों वर्षों पुरानी विरासत के साथ जीवंत नजर आया।
इस भव्य आयोजन में सुकमा जिले के कलाकारों ने अपनी सशक्त प्रस्तुति से सभी का मन मोह लिया और विभिन्न विधाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर जिले को गौरवान्वित किया।
पारला गट्टा की जीवंत नाट्य प्रस्तुति ने रचा इतिहास
कोंटा विकासखंड के सुदूर वनांचल पारला गट्टा से आए कलाकारों ने मुड़िया जनजाति के पारंपरिक जीवन, संघर्ष और संस्कृति को नाट्य रूप में मंच पर इस प्रकार प्रस्तुत किया कि दर्शक भाव-विभोर हो उठे। ताड़ पत्तों, मयूर पंखों और तीर-धनुष से सजी प्रस्तुति ने बस्तर की आत्मा को सजीव कर दिया। इस दल ने नाट्य विधा में प्रथम पुरस्कार अर्जित कर सुकमा का नाम रोशन किया।
गुंजन नाग और किरण नाग की पारंपरिक वेशभूषा ने बढ़ाया मान
छिंदगढ़ की गुंजन नाग और किरण नाग ने पारंपरिक जनजातीय वेशभूषा में सशक्त प्रस्तुति देकर प्रथम पुरस्कार प्राप्त किया। उनकी प्रस्तुति केवल सौंदर्य का प्रदर्शन नहीं, बल्कि जनजातीय अस्मिता, स्वाभिमान और सांस्कृतिक गौरव की जीवंत अभिव्यक्ति रही।
गृहमंत्री व मुख्यमंत्री ने किया सम्मानित
देश के गृहमंत्री श्री अमित शाह एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने विजेता कलाकारों को स्मृति चिन्ह एवं 50 हजार रुपये का पुरस्कार चेक प्रदान कर सम्मानित किया। यह सम्मान बस्तर की परंपरागत कलाओं, साधना और संघर्ष के प्रति राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृति का प्रतीक बना।
प्रशासनिक संवेदनशीलता से मिला मंच
कलेक्टर श्री अमित कुमार एवं जिला पंचायत सीईओ श्री मुकुन्द ठाकुर के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन द्वारा कलाकारों को मंच, संसाधन और प्रोत्साहन प्रदान कर जनजातीय संस्कृति के संरक्षण व संवर्धन की दिशा में उल्लेखनीय पहल की गई। यह आयोजन दर्शाता है कि विकास के साथ संस्कृति का संरक्षण भी शासन की प्राथमिकता है।
सहभागिता ने रचा नया अध्याय
सुकमा जिले से 12 विधाओं में 69 कलाकारों की सहभागिता ने यह सिद्ध कर दिया कि जब अवसर मिलते हैं, तो बस्तर की प्रतिभाएं राष्ट्रीय मंच पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाती हैं। यह सहभागिता केवल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि आत्मसम्मान, पहचान और उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव है।
बस्तर पंडुम 2026 ने यह संदेश स्पष्ट रूप से दिया कि बदल रहा है बस्तर — संवर रहा है बस्तर, जहाँ विकास और परंपरा साथ-साथ आगे बढ़ रहे हैं।
Author: Rajdhani Se Janta Tak
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