रायपुर। विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने जनसंख्या असंतुलन को देश के भविष्य के लिए गंभीर चुनौती बताते हुए कहा कि बदलता जनसंख्या अनुपात सामाजिक संरचना, सांस्कृतिक पहचान और राष्ट्रीय सुरक्षा पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है। राजधानी रायपुर में आयोजित पत्रकार वार्ता में उन्होंने धर्मांतरण और अवैध घुसपैठ को इस असंतुलन का प्रमुख कारण बताया और समाज से इन विषयों पर सजग रहने का आह्वान किया।
आलोक कुमार ने कहा कि समाज की सांस्कृतिक शक्ति और राष्ट्रीय संतुलन बनाए रखने के लिए प्रत्येक हिंदू परिवार में दो से तीन बच्चों का होना आवश्यक है। उनके अनुसार यह केवल जनसंख्या का विषय नहीं, बल्कि परंपरा, संस्कृति और सामाजिक स्थिरता से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने कहा कि मजबूत पारिवारिक व्यवस्था से आने वाली पीढ़ियां अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ी रह सकती हैं।
पत्रकार वार्ता में धर्मांतरण को गंभीर सामाजिक चुनौती बताते हुए कहा गया कि कई स्थानों पर लालच, भय और भ्रम फैलाकर धर्मांतरण कराया जा रहा है। इसे रोकने के लिए सामाजिक जागरूकता के साथ सख्त कानूनी उपायों की आवश्यकता बताई गई। वक्ताओं ने छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा धर्मांतरण विरोधी दिशा में उठाए गए कदमों की सराहना करते हुए इसे सामाजिक संतुलन बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।
इस दौरान समान नागरिक संहिता को लेकर भी चर्चा हुई। आलोक कुमार ने छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए आयोग गठन का स्वागत करते हुए कहा कि यह राष्ट्रीय एकता और संतुलित समाज व्यवस्था के लिए आवश्यक कदम है। उन्होंने वर्ष 2026 की जनगणना को महत्वपूर्ण बताते हुए नागरिकों से अपने धर्म का सही उल्लेख करने की अपील की, ताकि वास्तविक आंकड़े सामने आ सकें और उसी आधार पर नीतियां बनाई जा सकें।
कार्यक्रम में विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक और प्रबुद्ध वर्गों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। वक्ताओं ने राष्ट्रहित, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक संरक्षण को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। विश्व हिंदू परिषद ने कहा कि संगठन संविधान और विधि व्यवस्था के दायरे में रहकर सामाजिक चुनौतियों के समाधान के लिए कार्य करता रहेगा।
Author: Rajdhani Se Janta Tak
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