पानी पर कब्जा, जनता बेहाल! छुईखदान में सरकारी हैंडपंप दबंग के कॉम्प्लेक्स में कैद

 

खिलाड़ी प्यासे, गरीब परेशान… अफसरों की चुप्पी ने बढ़ाया गुस्सा

छुईखदान । छुईखदान नगर में सुशासन के दावों की पोल खोल देने वाला मामला सामने आया है। नगर के मुख्य खेल मैदान के सामने वर्षों से आम जनता की प्यास बुझाने वाला सरकारी हैंडपंप अब एक रसूखदार के कथित अवैध कॉम्प्लेक्स की चारदीवारी में कैद हो गया है। भीषण गर्मी के बीच खिलाड़ी, ठेला-खोमचा संचालक, राहगीर और आम नागरिक बूंद-बूंद पानी के लिए भटक रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अफसर चुप्पी साधे बैठे हैं।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि ग्राउंड के सामने बनाए गए कॉम्प्लेक्स निर्माण के दौरान सार्वजनिक बोरिंग को निजी परिसर में शामिल कर लिया गया। जो हैंडपंप कभी सैकड़ों लोगों की प्यास बुझाता था, अब उस पर आम जनता का पहुंचना लगभग नामुमकिन हो गया है।

सुबह-शाम खेल अभ्यास करने आने वाले बच्चे और युवा पानी के लिए इधर-उधर भटकते दिखाई देते हैं। वहीं शहीद स्मारक के पास ठेला लगाने वाले गरीब दुकानदार अब मजबूरी में पैसे खर्च कर पानी खरीद रहे हैं। लोगों का कहना है कि नगर पंचायत की मिलीभगत के बिना सार्वजनिक संपत्ति पर ऐसा कब्जा संभव ही नहीं है।

शिकायतें हुईं, कार्रवाई नहीं

मामले को लेकर स्थानीय नागरिकों ने नगर पंचायत से लेकर जिला प्रशासन तक शिकायतें कीं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे लोगों में भारी नाराजगी है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि किसी गरीब ने छोटी सी गलती की होती तो प्रशासन तुरंत बुलडोजर लेकर पहुंच जाता, लेकिन रसूखदार के मामले में सबकी आंखें बंद हैं।

सीएमओ का वही पुराना जवाब — “जांच करेंगे”

मामला तूल पकड़ने के बाद नगर पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी कुलदीप झा ने कहा कि एसडीएम और तहसीलदार के साथ मिलकर मामले की जांच की जाएगी और यदि कब्जा पाया गया तो कार्रवाई होगी। हालांकि जनता इस बयान से संतुष्ट नहीं है। लोगों का सवाल है कि जब कब्जा सबको साफ दिखाई दे रहा है, तो फिर जांच किस बात की?

भाजपा नेता ने खोला मोर्चा

भाजपा नेता एवं सामाजिक कार्यकर्ता संदीप महोबिया ने इस मामले को जनता के अधिकारों पर हमला बताते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक हैंडपंप पर कब्जा किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जरूरत पड़ी तो मंत्रालय और मुख्यमंत्री तक शिकायत पहुंचाई जाएगी।

जनता पूछ रही सांसद-विधायक आखिर कहां हैं?

सबसे बड़ा सवाल क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों की चुप्पी को लेकर उठ रहा है। चुनाव के समय पानी और विकास के बड़े-बड़े वादे करने वाले नेता अब इस गंभीर मुद्दे पर खामोश हैं। लोग तंज कस रहे हैं कि वोट के समय जनता याद आती है, लेकिन संकट के समय नेता गायब हो जाते हैं।

छुईखदान में अब यह मामला सिर्फ एक हैंडपंप का नहीं, बल्कि जनता के हक और प्रशासनिक जवाबदेही का बन चुका है। अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले दिनों में बड़ा जनआंदोलन देखने को मिल सकता है।

Deendayal Yadu
Author: Deendayal Yadu

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