नरोला राशन कांड, गरीबों के निवाले पर कथित डाका, 348 क्विंटल अनाज की कमी में भाजपा मंडल अध्यक्ष का नाम सामने।

लाडली विधायक शकुंतला पोर्ते के क्षेत्र में अपनी ही पार्टी के नेता पर गंभीर सवाल, समिति निलंबित, कलेक्टर का सख्त संदेश, जांच में दोषी मिले तो दर्ज होगा अपराध।

 

मोहन प्रताप सिंह

 

राजधानी से जनता तक, सूरजपुर/:– विकासखंड प्रतापपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत नरोला की शासकीय उचित मूल्य दुकान में राशन वितरण की कथित गड़बड़ी ने प्रशासनिक कार्रवाई के साथ-साथ सियासी हलकों में भी भूचाल ला दिया है। जांच में 348 क्विंटल चावल के साथ चना और शक्कर के स्टॉक में कथित भारी कमी सामने आने के बाद संबंधित समिति/समूह पर कार्रवाई की गई है। समिति को निलंबित कर राशन वितरण की वैकल्पिक व्यवस्था फिलहाल धोनधा की शासकीय उचित मूल्य दुकान से संबद्ध की गई है।

इस मामले ने उस समय और गंभीर रूप ले लिया, जब भाजपा मंडल अध्यक्ष गोविंदपुर का नाम सामने आया। ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित समिति के संचालन में उनकी भूमिका रही है और विवाद या शिकायत होने पर वे समिति का बचाव करते रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि प्रतापपुर क्षेत्र की लाडली विधायक शकुंतला पोर्ते के विधानसभा क्षेत्र में गरीबों के राशन से जुड़े इतने गंभीर मामले में उनकी ही पार्टी से जुड़े पदाधिकारी का नाम सामने आने के बावजूद क्या पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होगी?

 

ग्रामीणों का आरोप है कि जुलाई और अगस्त माह का राशन कई पात्र हितग्राहियों को नहीं दिया गया। वहीं, फर्जी तरीके से अंगूठा लगवाकर राशन नहीं देने जैसी गंभीर शिकायतें भी जांच अधिकारियों तक पहुंची हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब गरीब और आदिवासी परिवार अपने हिस्से के चावल, चना और शक्कर के लिए भटक रहे थे, तब आखिर इतनी बड़ी मात्रा में राशन के स्टॉक में कथित कमी कैसे हो गई?

 

ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि यदि जांच में बड़े पैमाने पर अनियमितता की पुष्टि होती है, तो कार्रवाई केवल दुकान चलाने वाली समिति तक सीमित क्यों रहे? राशन दुकान के संचालन, निगरानी और कथित संरक्षण से जुड़े हर व्यक्ति की भूमिका की जांच होनी चाहिए। हालांकि, किसी व्यक्ति का नाम सामने आने मात्र से उसे दोषी नहीं माना जा सकता और उसकी भूमिका की अंतिम पुष्टि जांच, दस्तावेजों एवं साक्ष्यों के आधार पर ही होगी।

 

ग्रामीणों की शिकायत के बाद खाद्य विभाग हरकत में आया। अधिकारियों के निर्देश पर फूड इंस्पेक्टर शशि जायसवाल ने मौके पर पहुंचकर दुकान के खाद्यान्न स्टॉक, वितरण पंजी और अन्य दस्तावेजों की जांच की। जांच के दौरान 348 क्विंटल चावल के साथ अन्य खाद्यान्न सामग्री में कथित कमी और अनियमितता के तथ्य सामने आने के बाद संबंधित समिति के खिलाफ कार्रवाई की गई।

 

मामले को लेकर नरोला सहित आसपास के गांवों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली गरीबों के लिए जीवनरेखा है और इसमें कथित हेराफेरी सीधे तौर पर जरूरतमंद परिवारों के अधिकारों पर चोट है। ग्रामीणों ने राशन उठाव और वितरण का पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक करने तथा जांच में जिम्मेदार पाए जाने वाले हर व्यक्ति के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

मामले पर सूरजपुर कलेक्टर रेना जमील ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि गरीबों का निवाला छीनने वाले और राशन की हेराफेरी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। संबंधित समिति के खिलाफ कार्रवाई करते हुए प्रथम नोटिस जारी किया गया है। जवाब मिलने के बाद नियमानुसार विस्तृत जांच की जाएगी और दोषी पाए जाने पर अपराध दर्ज कराने की कार्रवाई होगी। मामले में जो भी लोग संयुक्त रूप से जिम्मेदार पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

 

फूड इंस्पेक्टर शशि जायसवाल ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए अधिकारियों के निर्देश पर तत्काल कार्रवाई की गई है। जांच अभी जारी है और स्टॉक, वितरण व्यवस्था तथा दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है। संबंधित पक्ष को नोटिस जारी कर जवाब लिया जाएगा और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

 

अब नरोला राशन मामले में पूरे क्षेत्र की नजर जांच की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि 348 क्विंटल चावल सहित चना और शक्कर की कथित कमी का जिम्मेदार आखिर कौन है? क्या कार्रवाई केवल समिति तक सीमित रहेगी या फिर संचालन, निगरानी और कथित राजनीतिक संरक्षण से जुड़े सभी लोगों की भूमिका से पर्दा उठेगा?

 

लाडली विधायक शकुंतला पोर्ते के सामने भी अब जनता का सीधा सवाल है, क्या वह अपनी ही पार्टी से जुड़े लोगों पर उठ रहे आरोपों की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग करेंगी, या गरीबों के राशन पर उठे गंभीर सवालों का जवाब सियासी चुप्पी में दबा दिया जाएगा?

 

ग्रामीणों की मांग साफ है, जांच निष्पक्ष हो, राशन का पूरा हिसाब सार्वजनिक हो और गरीबों के हक पर कथित डाका डालने वाले हर दोषी के खिलाफ बिना किसी राजनीतिक दबाव के कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। अब देखना यह है कि प्रशासन की जांच में किन लोगों की जिम्मेदारी तय होती है और इस कथित राशन कांड में आखिर किस-किस पर कानून का शिकंजा कसता है।

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