तेल नदी पार छत्तीस गांवों के किसानों ने मंडी में धान नहीं बेचने का लिया गया फैसला

राजधानी से जनता तक।  गरियाबंद। चरण सिंह क्षेत्रपाल

देवभोग -जिला गरियाबंद के विकास खण्ड देवभोग क्षेत्र से तेल नदी पार 36 गांवों के किसानों ने मंडी में धान नहीं बेचने का लिया जा रहा है फैसला । कुछ ही दिनों में झिरीपानी मंडी में धान बेचने वाले किसानों ने समिति में धान नहीं बेचने का फैसला लिया गया। इसी के चलते और दो मंडियां है जैसे – निष्ठीगुडा़ ,दिवानमुडा़ मंडी के किसानों ने भी मंडी में धान नहीं बेचने का फैसला कर चुके है। इसी तरह आज झाखरपारा मंडी में धान बेचने वाले सभी किसानों ने मां सुरूबंदलेन देवालय स्थल रूप के छाया नीचे 4 पंचायत से कुल 10 गांवों के किसान एकत्रित हो कर किसान सभा का आयोजन रखीं गई थी। आज के इस बैठक में लगभग 100-200 किसान उपस्थित हुए। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य यह है कि तेल नदी पार छत्तीस गांवों के सभी किसानों के खेतों में धान इसी साल ठीक नहीं हुई है, चुकी इस वर्ष अल्प बारिश होने के वजह से सब के खेतों में धान रोपाई, ब्यासी जैसे अन्य कृषि कार्य क्षेत्र में ठीक ढंग से कार्य नहीं हों पाई है। इसी बजह से तेल नदी पार छत्तीस गांव के सभी किसानों के चेहरे में दुःखीत , नाराजगी चलते हुए। सभी किसानों ने मंडी में धान नहीं बेचने का फैसला किया गया है। इसी बीच आज गांव के किसान व जनप्रतिनिधि श्री असलम मेमन जी ने कहा कि विगत वर्ष की तुलना में इसी वर्ष किसानों को कृषि क्षेत्रों में भारी गिरावट हुई है।जिस समय किसानों को कृषि क्षेत्रों में पानी जितनी मात्रा में आवश्यक होती है। वह प्रायत:संभव नहीं हो सका ।जिसकी वजह से आज किसानों के खेतों में धान फसल उत्पादन ठीक ढंग से नहीं हों पाया है। जहां किसान अपने खेतों में कुल 100-200 बोरा धान उत्पादन होता है,उसी खेतों में लगभग 10-20 बोरा धान निकाल पाना मुश्किल हो गया है। इसी साल किसान अपने खेतों के धान फसल को देख कर सीने के कलेजा , और दोनों आंखों में से लहुलुहान गंगा हर वक्त बह रही है। इसी कारण आज ग्रामीण किसान भाइयों को मंडी में धान बेच पाना बहुत मुश्किल हो गया है, इस लिए सभी किसानों ने किसान सभा का आयोजन रख कर समिति में धान नहीं बेचने का फैसला लिया है।

वरिष्ठ किसान श्याम लाल टांडी ने कहा – कि 36 गांवों के किसान भाइयों को अकाल पीड़ित से किस तरह जिंदगी व्यतीत करनी होगी, सभी किसान भाई बड़ी चिंतित में पड़ गए हैं। चुकी किसान अपने खेतों में धान फसल करने के लिए बैंकों से ऋण ले कर बीज खाद तथा कृषि कार्य में व्यय कर चुके है।उसी ऋण पैसा को चुकाने के लिए किसान दिनभर अपने खेतों में कड़ी मेहनत ख़ून पसीना बहा कर किसान अपना ऋण अदा करने में सक्षम हो पा रहे थे। परन्तु इस वर्ष ऐसा नहीं हुआ है। इसी बजह से सभी किसान भाइयों ने मंडी में धान नहीं बेचने का फैसला लिया है, और उनके कथन भी सत्य है। चुकी किसान धान कहां से ला कर मंडी में बेचेंगे। स्थिति बहुत नाज़ुक है।

झाखरपारा वरिष्ठ किसान जदू राम यादव ने कहा कि मेरा ज़मीन 7 एकड़ है और मैं एक बोर खनन भी अपने खेतों में किया हूं, लेकिन मुझे इस वर्ष जितनी मात्रा में धान उपलब्ध हुई है कि क्या बताऊं। मुझे बहुत दुःखित हूं, चुकी प्रति वर्ष मुझे धान फसल से ज्यादा लाभ मिल रहा था। लेकिन इसी साल मुझे ही नहीं बल्कि सभी किसानों को धान फसल से भारी क्षतिग्रस्त हुई है।

इन तमाम विषयों पर विशेष चर्चा करते हुए 4 पंचायत अंतर्गत 10 गांवों के किसानों ने मंडी में धान नहीं बेचने का फैसला लेते हुए आज सभी किसान भाइयों ने देवभोग अनुविभागीय अधिकारी अर्पिता पाठक जी के कार्यलय दफ्तर में मंडी में धान नहीं बेचने के संबंध में आवेदन पत्र लिखकर कर सभी किसानों ने ज्ञापन सौंपे।

इस परिपेक्ष में आज 4 पंचायत अंतर्गत 10 गांवों का नाम है – झाखरपारा,कोदोभाठा, उसरी पानी,दरलीपारा,खवासपारा,सहसखोल,दाबरीभाठा,कोडकीपारा,बीसी पारा,सरगीबहली इन तमाम गांवों के किसानों ने आज झाखरपारा मंडी मुख्यालय गांव में किसान सभा में सभी उपस्थित थे।

Rajdhani Se Janta Tak
Author: Rajdhani Se Janta Tak

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