करोड़ों खर्च के बाद भी हो रहा छात्रावास का घटिया निर्माण कार्य – सूरजपुर।

नियमों को ताक पर रखकर कराया जा रहा है छात्रावास भवन का निर्माण कार्य, जिम्मेदार बने मूकदर्शक।

सूरजपुर लोक निर्माण विभाग का निर्माण कार्य लगातार बना हुआ है जिले में सुर्खियों पर जो कर रहा है लगातार कारनामे पर कारनामा।

ग्राम नमदगिरी में करोड़ों की लागत से बन रहे छात्रावास का निर्माण कार्य अधर में जहां किए गए कार्यों में गुणवत्ताहीन विभाग की कार्यशैली पर उठ रहे है कई सवाल।

मोहन प्रताप सिंह

सूरजपुर/:– लोक निर्माण विभाग लगातार सुर्खियों में बना हुआ है जो जिला मुख्यालय से लगे ग्राम नमदगिरी में करोड़ों की लागत से बनाये जा रहे छात्रावास भवन के निर्माण में जमकर धांधली किये जाने का मामला सामने आया है।बताया जा रहा है कि छात्रावास भवन निर्माण का काम कई वर्षो से चल रहा है। छत्तीसगढ़ में बच्चों की आवासी शिक्षा और उनके बेहतर भविष्य के लिए शासन कई महत्वपूर्ण योजनांए चला रही है। लेकिन इन योजनाओं पर भ्रष्ट अफसर किस तरह से गिद्ध नजर डाले हुए हैं इसका उदाहरण सूरजपुर जिले में देखी जा सकती है।

निर्माण कार्य में ईमानदारी नहीं सिर्फ पैसे खर्च

सरकार द्वारा करोड़ों रुपए खर्च कर भवन क्षात्रवास का निर्माण कराया जा रहा है। ताकि इलाके के बच्चों को गुणवत्ता पूर्ण निर्माण से बने छात्रवास में रहने वालो बच्चो को अच्छा भवन उपलब्ध हो सके , लेकिन निर्माण सवालों के घेरे में नजर आ रहा है। जहा भवन का निर्माण कार्य घटिया किस्म की रेत और अन्य सामग्रियों से किया जा रहा है। जिस पर कभी किसी जिमेदार अधिकारी को निरीक्षण करने आते नही देखा गया है।

ठेकेदार के भरोसे निर्माण कार्य के अधिकारी नदारद

पूरा निर्माण कार्य ठेकेदार के भरोसे छोड़ दिया है। जिसकी अब घटिया किस्म की सामग्री से हो रहे निर्माण की चर्चा क्षेत्र में बड़े जोरो सोरो से होती नजर आ रही। कि पैसे सरकार के द्वारा खर्च किये जा रहे राशि का उपयोग हो रहा। जहा कोई जिम्मेदार देखने भी आने को तैयार नही। और ठेकेदार अपने नाम का रौब जमा कर घटिया किस्म की सामग्री का उपयोग कर निर्माण करवा रहा है। निर्माण कार्य नियमो को ताक पर रखकर किया जा रहा है। वही विभागी अधिकारी भी मोन बने हुए हैं। जिससे की निर्माण के बाद भविष्य में उक्त भवन जल्दी ही खंडर में तब्दील हो सकता है। जिम्मेदारी से जिम्मेदारो ने आकर सामग्री की जांच करनी चाहिए।

निर्माण स्थल से सूचना पटल गायब

लोक निर्माण विभाग के अन्य निर्माण साइट की तरह यहां भी सूचना पटल नहीं लगाया गया है
जिससे आम नागरिकों को किसी भी तरह की कोई जानकारी नहीं मिल पाती है। जबकि किसी भी निर्माण स्थल पर सूचना पटल का लगाना जरूरी माना जाता है विभाग के अधिकारी भी यह बात मानते हैं की सूचना पटल लगना चाहिए फिर भी अधिकारी सूचना पटल नहीं लगवा पा रहे हैं इसके पीछे क्या कारण है क्या छुपाने का प्रयास किया जा रहा है पता नहीं।

घटिया निर्माण कार्य जारी

लोक निर्माण विभाग द्वारा पिछले कई वर्षों से पंचायत में छात्रावास भवन का निर्माण कराया जा रहा है। करोड़ों रुपये की लागत से बन रहा ये छात्रावास निर्माण पूरा होने से पहले ही बदतर स्थिति में पहुंच गया है। अधिकारियों की लापरवाही से अभी से ही भवन में हुए गुणवत्ता हीन कार्य की पोल खुल रही हैं। निर्माण में सारे मानकों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं छात्रावास निर्माण पूरा होने से पहले ही घटिया निर्माण की कहानी खुद बयां करने लगा है, सीमेंट का ऐसा प्रयोग की पूछिए मत दरारों को हल्के हाथ के दबाव पर सीमेंट भरभरा के गिर रहे हैं।ऐसे घटिया निर्माण से निर्मित छात्रावास बन जाने पर वहां रहने वाले बच्चे कैसे जान जोखिम में डालकर शिक्षा ग्रहण करेंगे यह अंदाजा लगा सकते हैं।

कैसे रहेंगे बच्चे जो कभी भी घटित हो सकती है बड़ी घटना

जहां प्लिंथ लेबल के कार्यो में भारी अनियमितताएं की गई है वही न दिवालो के लिए किये डीपीसी का हाल तो पूर्णतः बेहाल है और तो फर्श के लिए किये जाने वाली मिट्टी पटाई के कार्यों में क्युरिंग यानी पानी तराई नही होने से फर्श का कार्य भी भगवान भरोसे है व रेता तो ऐसा डाला जा रहा है जो संपूर्ण रुप से मिट्टी है एवं जो ईंट प्रयोग किया जा रहा है वह भी मानक स्तर का नहीं है और तो और ऐसे मसालो का उपयोग किया जा रहा है जो कि निम्न स्तर का है अब बात की जाए सरिये (राड) कि तो जितना व जिस अनुपात में लगाया जाना है उसमें भी जमके भ्रष्टाचार किया जा रहा है, कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि यहां रहने वाले छात्र-छात्राओं के भविष्य में खतरा मंडरा रहा है

छात्रावास में हुए निर्माण कार्यों का भौतिक सत्यापन कराया जाए तो बड़े भ्रष्टाचार का खुलासा हो सकता है और पता चल सकता है कि शासन को किस तरह से करोड़ों रुपए का चूना लगाया जा रहा है। देखना यह है कि इन सारे खुलासे के बाद विभाग के जिम्मेदारों के ऊपर कोई कार्रवाई होती है या नहीं।

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