अबूझमाड़ की वादियों में गूँज रही किलकारियाँ

​रायपुर, 08 जुलाई 2826 / नारायणपुर जिले में उम्मीद का संबल बनी ‘मातृ वंदना’ योजनाप्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना नारायणपुर (छत्तीसगढ़) में हर मां का सम्मान, हर शिशु का सुरक्षित भविष्य की गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए वरदान साबित हुई है। यह योजना जच्चा-बच्चा के स्वास्थ्य में सुधार और संभावित आय हानि की भरपाई करने में एक बड़ा आर्थिक संबल बनी है।

अबूझमाड़ की माताओं के लिए मातृ वंदना योजना वरदान साबित हो रही है

छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल का वह सुदूर कोना, जहाँ कभी विपरीत भौगोलिक परिस्थितियाँ और जागरूकता की कमी गर्भवती माताओं के स्वास्थ्य के आड़े आती थी, आज वहाँ बदलाव की एक नई बयार बह रही है। नारायणपुर जिले के ओरछा जैसे घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ियों से घिरे विकासखंडों में अब सुरक्षित मातृत्व की एक नई और सुखद कहानी लिखी जा रही है। इस बदलाव की सूत्रधार बनी है भारत सरकार की महत्वाकांक्षी और संवेदनशील ‘प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना’, जो जिला प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रयासों से अब अबूझमाड़ की माताओं के लिए एक वरदान साबित हो रही है।

आर्थिक सहायता सीधे लाभार्थियों के बैंक खाते में

अक्सर ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में आर्थिक तंगी के कारण गर्भवती माताएं गर्भावस्था के अंतिम दौर तक कठिन शारीरिक श्रम करने को मजबूर होती थीं। इसका सीधा असर उनकी और होने वाले बच्चे की सेहत पर पड़ता था। लेकिन ‘मातृ वंदना योजना’ ने इस परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया है। योजना के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के जरिए पहुंचती है। इस पूरी तरह से पारदर्शी व्यवस्था ने न केवल ग्रामीणों का भरोसा जीता है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान मजदूरी के नुकसान की भरपाई करने और अपने लिए फल, दूध तथा पौष्टिक आहार जुटाने का अधिकार भी दिया है।

बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के संकल्प हो रहे हैं मजबूत

इस योजना की संवेदनशीलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह पहली जीवित संतान के जन्म पर माता को 5 हजार रुपए की वित्तीय सहायता देती है। वहीं, ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ के संकल्प को मजबूत करते हुए, दूसरी संतान के रूप में बालिका के जन्म पर 6 हजार रुपए की विशेष राशि सीधे माँ के खाते में जमा की जाती है।

2025-26 में जिले के 1192 पात्र हितग्राहियों को मिला योजना का लाभ

​इस योजना की सफलता की असली गवाही नारायणपुर के मैदानी आँकड़े दे रहे हैं। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, एएनएम और स्वास्थ्य विभाग के समन्वित प्रयासों का ही नतीजा है कि विपरीत परिस्थितियों के बावजूद पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 में जिले के 1,192 पात्र हितग्राहियों को इस योजना का लाभ मिला, जिनमें से अकेले सुदूर ओरछा विकासखंड की 332 माताएं शामिल थीं। बदलाव का यह सिलसिला थमा नहीं है; चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में भी अब तक जिले की 319 से अधिक माताओं को यह सुरक्षा कवच मिल चुका है, जिसमें ओरछा की 81 महिलाएं शामिल हैं।

अस्पतालों में सुरक्षित तरीके से कराए जा रहे हैं प्रसव

​आर्थिक सहायता के इस प्रोत्साहन ने नारायणपुर के ग्रामीण परिवारों की सोच में एक बड़ा व्यवहारिक बदलाव पैदा किया है। अब जैसे ही किसी घर में नए मेहमान के आने की आहट होती है, परिवार तुरंत आंगनवाड़ी केंद्र में समय पर पंजीयन कराता है। गर्भवती महिलाओं की नियमित प्रसव पूर्व स्वास्थ्य जांच (ANC) हो रही है, और सबसे बड़ी बात यह है कि अब प्रसव घर के बजाय अस्पतालों में (संस्थागत प्रसव) सुरक्षित तरीके से कराए जा रहे हैं। यही नहीं, जन्म के बाद नवजात शिशुओं का पूर्ण टीकाकरण भी समय पर सुनिश्चित हो रहा है।

माँ के चेहरे पर संतोष और मुस्कान बिखेर दी मातृ वंदना योजना ने

​नारायणपुर जिले में इस योजना का सफल क्रियान्वयन केवल वित्तीय सहायता का जरिया नहीं है, बल्कि यह स्वस्थ शिशु, सुरक्षित मातृत्व और कुपोषण से मुक्ति के राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो रहा है। जिला प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग आज भी सतत रूप से प्रयासरत हैं ताकि सुदूर अंचल की कोई भी माँ इस लाभ से अछूती न रहे। सच कहें तो, ‘प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना’ ने नारायणपुर की हर उस माँ के चेहरे पर संतोष और मुस्कान बिखेर दी है, जो अपने आँचल में एक स्वस्थ और खुशहाल भविष्य का सपना संजोए हुए है।

Rajdhani Se Janta Tak
Author: Rajdhani Se Janta Tak

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