उरमाल का ‘अनोखा’ विकास: कागजों पर उगीं सड़कें, हवा में बने शौचालय और सादे पर्चों पर उड़ गए लाखों!

उरमाल पंचायत में फर्जी बिलों से लाखों का गोलमाल,जनपद सदस्य ने उजागर की धांधली

भ्रष्टाचार की ‘सुपरहिट’ फिल्म: 13 लाख की रिकवरी ठंडे बस्ते में, अब नए फर्जीवाड़े पर अफसरों की मेहरबानी!

उरमाल का ‘अनोखा’ विकास: कागजों पर उगीं सड़कें, हवा में बने शौचालय और सादे पर्चों पर उड़ गए लाखों!

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मैनपुर / गरियाबंद: छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के मैनपुर विकासखंड अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत उरमाल इन दिनों विकास कार्यों के नाम पर हो रही खुली लूट और भ्रष्टाचार का गढ़ बन चुकी है। पंचायत के जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों और सचिव की कथित मिलीभगत से जनता के टैक्स के पैसे और शासकीय अनुदान को दोनों हाथों से लूटा जा रहा है। इसका सबसे बड़ा और पुख्ता सबूत पंचायत द्वारा जारी किए गए और विभिन्न ट्रेडर्स के नाम पर बने वे सादे-कच्चे बिल व कैश-मेमो हैं, जो प्रशासनिक और वित्तीय नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं।

*कच्चे बिलों और फर्जी पर्चियों का खेल: कैसे हो रही है अंधेरगर्दी?*

जांच और पड़ताल में सामने आए विभिन्न फर्मों (जैसे *पदमन ध्रुव कृषि ट्रेड्स ,नरेश पटेल कृषि फार्म, और बिसी ट्रेडर्स*) के बिलों का विश्लेषण करने पर यह साफ उजागर होता है कि धरातल पर काम कम और कागजों में वित्तीय घोड़े ज्यादा दौड़ाए जा रहे हैं। बिना जीएसटी (GST) नंबर, बिना प्राधिकृत पैड और सादे पर्चों के सहारे लाखों रुपये का आहरण कर आपस में बंदरबांट की गई है।

सड़क संधारण व मुरुम कार्य में धांधली सड़क मरम्मत और मुरुम बिछाने के नाम पर एक ही प्रकार के कार्यों के लिए
नरेश पटेल कृषि फार्म पदमन ध्रुव कृषि ट्रेड्स और बिसी ट्रेडर्स से अलग-अलग तिथियों में ₹1.10 लाख से लेकर ₹1.58 लाख तक के कच्चे बिल तैयार कराकर भारी-भरकम राशि निकाली गई है

तालाब सफाई और गहरीकरण में कागजी खेल

ग्राम पंचायत के तालाबों की साफ सफाई के नाम पर कागजों में ही काम दिखाकर वित्तीय नियमों को ताक पर रखते हुए फर्जी भुगतान किए गए हैं।

*सामग्री खरीदी के नाम पर फर्जीवाड़ा*

निर्माण और रखरखाव सामग्री एवं अन्य उपकरणों की आड़ में *पदमन ध्रुव ट्रेडर्स (उरमाल)* से हजारों रुपये के कच्चे बिल पास कराए गए हैं। जनपद सदस्य डॉ माखन कश्यप का दावा है कि इन सामग्रियों की धरातल पर कोई भौतिक मौजूदगी ही नहीं है।
वित्तीय अनियमितता का लेखा-जोखा कुछ इस प्रकार है

सड़क संधारण व मुरुम बिछाना , नरेश पटेल कृषि फार्म, पदमन ध्रुव व बिसी ट्रेडर्स | कच्चे बिल / गैर-जीएसटी पर्ची | ₹1.10 लाख से ₹1.58 लाख तक (प्रति बिल) पैसों का आहरण किया गया है , एवं सामग्री खरीदी (पाइप, रॉड आदि) कई सारे फर्जी बिल (उरमाल) हस्तलिखित कैश-मेमो के जरिए से हजारों रुपये की अनियमितता सामने आई है

किसकी जेब में जा रहा विकास का पैसा?*

ग्रामीणों ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि उरमाल पंचायत में न तो मानक के अनुरूप कोई निर्माण कार्य कराया गया है और न ही गांव का कोई वास्तविक विकास हुआ है। सरपंच और सचिव की कार्यप्रणाली ने पंचायत भवन को कथित रूप से भ्रष्टाचार का अड्डा बना दिया है

टैक्स ट्रेल छुपाने की साजिश:

जानकारों के अनुसार, जानबूझकर पक्के (GST) बिलों की जगह कच्चे पर्चों और सादे कैश-मेमो का उपयोग इसीलिए किया गया है ताकि भविष्य में किसी ऑडिट या जांच के दौरान पक्का रिकॉर्ड या टैक्स ट्रेल न मिल सके।

जनपद सदस्य ने उठाये सवाल

उरमाल क्षेत्र के जनपद सदस्य (डॉ योगी राज माखन कश्यप)ने पंचायत प्रशासन और जिला पंचायत के मुख्य कार्य पालन अधिकारी की कार्यशैली पर कड़े सवाल खड़े करते हुए निष्पक्ष जांच और त्वरित कार्रवाई की मांग की है।
15वें वित्त आयोग के फंड में धांधली का आरोप
जनपद सदस्य के अनुसार, 15वें वित्त आयोग और अन्य मदों से पंचायत में काफी मात्रा में धनराशि का आहरण किया गया है। इसमें गिट्टी/मुरमीकरण और शौचालय निर्माण के नाम पर लाखों रुपये की राशि निकाली गई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कागजों में शौचालय निर्माण दर्शाकर फंड निकाल लिया गया, जबकि धरातल पर ग्रामीण आज भी शौचालय तलाश रहे हैं। कई स्थानों पर जिओ-टैगिंग में भी हेरफेर की बात सामने आई है, जहाँ अन्य क्षेत्रों या निजी स्थानों के शौचालयों व सड़कों की फोटो का उपयोग कर राशि निकाल ली गई है।
बिना जीएसटी और निजी खातों में भुगतान का दावा
जनपद सदस्य ने बताया कि पंचायत सचिव और संबंधित अधिकारियों द्वारा नियमों को ताक पर रखकर काम किया जा रहा है:

गैर-जीएसटी फर्मों और निजी व्यक्तियों के खातों में सरकारी राशि ट्रांसफर की गई है। 15वें वित्त की राशि से मानदेय तक का गलत भुगतान किया गया है। बिलों पर आवश्यक हस्ताक्षर तक नहीं हैं; पूछने पर डिजिटल सिग्नेचर (DSC) का हवाला देकर पल्ला झाड़ लिया जाता है। पंचायत का आय-व्यय (बाज़ार ठेका, नल-कर, जल-कर, मकान-कर, एनओसी आदि) का कोई सही लेखा-जोखा और बही-खाता मेंटेन नहीं किया जा रहा है।

*प्रशासनिक उदासीनता से मनोबल बढ़ा*

जनपद सदस्य ने दुख जताते हुए कहा कि पूर्व में भी लगभग 13 लाख रुपये की रिकवरी का मामला सामने आया था, तब इस मामले में उन्होंने जिला पंचायत के ceo प्रखर चंद्राकर से बात की थी और आवेदन भी दिया था लेकिन अब तक न तो एक रुपये की वसूली हो सकी और न ही कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई हुई।

उन्होंने कहा कि अधिकारियों के बार-बार तबादले होने और प्रशासनिक शिथिलता के कारण दोषियों का हौसला बुलंद है, जिससे पंचायत में भ्रष्टाचार चरम पर पहुँच गया है। जनपद सदस्य ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस मामले में निष्पक्ष जांच कर कड़ी कार्रवाई नहीं की गई, तो वे मामले को उच्च स्तर पर ले जाएंगे।

*प्रशासनिक चुप्पी पर उठे गंभीर सवाल*

इस पूरे मामले के सामने आने के बाद अब उग्र सवाल गरियाबंद जिला प्रशासन और जनपद पंचायत मैनपुर के उच्च अधिकारियों पर उठ रहे हैं:

क्या जिम्मेदार अधिकारी पुख्ता सबूत और पर्चियां सामने होने के बावजूद आंखें मूंदे बैठे रहेंगे?

क्या शासकीय राशि का दुरुपयोग करने वाले जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई होगी या उन्हें अभयदान मिलता रहेगा?

ग्रामीणों की चेतावनी: जांच न होने पर बड़े आंदोलन का ऐलान

उरमाल ग्राम पंचायत के जागरूक नागरिकों और ग्रामीणों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि समय रहते इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय न्यायिक एवं प्रशासनिक जांच कराकर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं की गई, तो गांव के आक्रोशित नागरिक सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन और चक्काजाम करने के लिए बाध्य होंगे। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में उत्पन्न होने वाली किसी भी अप्रिय स्थिति की संपूर्ण जिम्मेदारी जिला एवं जनपद प्रशासन की होगी।

Omkar Parvate
Author: Omkar Parvate

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