खेल के उत्सव में प्रोटोकॉल की अनदेखी, आयोजन समिति पर उठे सवाल।

मोहन प्रताप सिंह
राजधानी से जनता तक सूरजपुर/भटगांव:– जनपद पंचायत भैयाथान अंतर्गत ग्राम पंचायत बरौधी में आयोजित ग्रामीण अंचल आधार कार्ड फुटबॉल प्रतियोगिता 2025–26 का समापन समारोह उत्साह और खेल भावना के साथ संपन्न हुआ। ग्रामीण प्रतिभाओं को मंच देने वाला यह आयोजन जहां खिलाड़ियों और दर्शकों के लिए यादगार रहा, वहीं समापन समारोह में आमंत्रण पत्र और मंच व्यवस्था में संवैधानिक प्रोटोकॉल की अनदेखी ने पूरे आयोजन को विवादों के घेरे में ला दिया।
कपसरा बनाम तमोर : रोमांच से भरपूर फाइनल
प्रतियोगिता का फाइनल मुकाबला ग्राम पंचायत कपसरा एवं ग्राम पंचायत तमोर की टीमों के बीच खेला गया। मैच के पहले हाफ में ही कपसरा की टीम ने शानदार तालमेल के साथ एकमात्र निर्णायक गोल कर बढ़त बना ली।
दूसरे हाफ में तमोर की टीम ने बराबरी के लिए जोरदार प्रयास किए, लेकिन कपसरा की सशक्त रक्षा पंक्ति के सामने तमोर को सफलता नहीं मिल सकी।

एक गोल की बढ़त ने दिलाया खिताब
पूरा मुकाबला संघर्ष और रोमांच से भरा रहा, लेकिन अंततः कपसरा की टीम ने 1–0 से जीत दर्ज कर प्रतियोगिता का खिताब अपने नाम किया। तमोर की टीम को संतोषजनक खेल के बावजूद उपविजेता से संतोष करना पड़ा।
विजेता–उपविजेता टीमों का सम्मान समारोह
समापन अवसर पर उपस्थित अतिथियों द्वारा विजेता कपसरा और उपविजेता तमोर की टीमों को नकद पुरस्कार राशि एवं चमचमाती ट्रॉफी प्रदान कर सम्मानित किया गया। समारोह के दौरान खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए ग्रामीण अंचल में खेल संस्कृति को मजबूत करने की बात कही गई।
खेल आयोजन सराहनीय, मंच व्यवस्था बनी विवाद की वजह
जहां एक ओर खेल आयोजन की व्यापक सराहना हो रही है, वहीं समापन समारोह के आमंत्रण पत्र में अतिथियों के नामों के क्रम और मंचीय व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। जानकारों का कहना है कि सार्वजनिक आयोजनों में संवैधानिक प्रोटोकॉल का पालन अनिवार्य होता है, जिसकी अनदेखी यहां स्पष्ट दिखाई दी।
वर्तमान जनप्रतिनिधि पीछे, पूर्व पदाधिकारी आगे
आमंत्रण पत्र में वर्तमान निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को अपेक्षित स्थान न देकर पूर्व मंत्री और पूर्व सांसद जैसे पदों को आगे दर्शाया गया। इसे शिष्टाचार और लोकतांत्रिक मर्यादा के विरुद्ध बताया जा रहा है।
नगर निकाय व प्रशासनिक पदों के क्रम में गड़बड़ी
नगर पालिका एवं नगर पंचायत अध्यक्षों के क्रम में असंतुलन देखा गया। इसके साथ ही मुख्य चिकित्सा अधिकारी जैसे वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को भी प्रोटोकॉल के अनुरूप स्थान नहीं दिया गया, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था की उपेक्षा का आरोप लग रहा है।
सरपंच की अध्यक्षता केवल औपचारिकता बनकर रह गई?
ग्राम पंचायत स्तर के इस आयोजन में सरपंच की अध्यक्षता होते हुए भी मंचीय भूमिका प्रभावी नहीं दिखाई दी, जिससे ग्राम स्तरीय संवैधानिक पद की गरिमा पर प्रश्नचिह्न लग गया।
आयोजन समिति की भूमिका पर उठे तीखे प्रश्न
आमंत्रण पत्र के अनुसार कार्यक्रम का आयोजन समस्त ग्रामवासी एवं युवा फुटबॉल क्लब, बरौधी द्वारा किया गया। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या आयोजन समिति को प्रोटोकॉल की जानकारी नहीं थी? या फिर यह अनदेखी जानबूझकर की गई? जानकारों के अनुसार, दोनों ही स्थितियां लोकतांत्रिक मर्यादाओं के अनुकूल नहीं हैं।
सम्मान भाषणों से नहीं, मंचीय अनुशासन से दिखता है
राजनीतिक और प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि सम्मान केवल स्वागत भाषणों से नहीं, बल्कि मंचीय क्रम और व्यवस्था से झलकता है। यदि भविष्य में ऐसे आयोजनों में प्रोटोकॉल का गंभीरता से पालन नहीं किया गया, तो खेल जैसे सकारात्मक आयोजनों की गरिमा बार-बार सवालों के घेरे में आती रहेगी।



