छत्तीसगढ़ में माइक्रोफाइनेंस संस्थानों की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सक्ती जिले के डभरा तहसील अंतर्गत ग्राम कटौद निवासी उपेंद्र नाथ चंद्रा ने ईसाफ स्वसहाय मल्टीस्टेट एग्रो को-ऑपरेटिव क्रेडिट सोसायटी लिमिटेड और उससे जुड़े अधिकारियों पर संगठित आर्थिक अपराध, फर्जी लोन वितरण, दस्तावेजों में हेराफेरी और कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाने के गंभीर आरोप लगाए हैं।

शिकायतकर्ता के अनुसार, वह वर्ष 2021 से 2024 तक संबंधित माइक्रोफाइनेंस संस्था में विभिन्न जिलों में कार्यरत रहा। आरोप है कि संस्था का पंजीकरण एक नाम से है, लेकिन संचालन दूसरे नाम से किया जा रहा है। नियमों के उल्लंघन के बावजूद न तो लाइसेंसिंग एजेंसियों द्वारा ऑडिट किया गया और न ही बार-बार की गई शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई हुई।
उपेंद्र चंद्रा का आरोप है कि संस्था द्वारा पहले अवैध रूप से लाखों रुपये का लेन-देन किया गया, फिर फर्जी दस्तावेज तैयार कर कर्मचारियों को थानों और न्यायालयों में फंसाया गया। उनके अनुसार, 150 से अधिक कर्मचारियों को इस तरह मामले में उलझाया गया, जबकि कुछ जिलों में कर्मचारियों की गिरफ्तारी भी हुई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शिकायत देने के बावजूद पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज नहीं की गई और उल्टे उन पर ही दबाव बनाया गया।
मामले से जुड़े उत्पीड़न का सिलसिला यहीं नहीं रुका। शिकायतकर्ता ने अपने पैतृक गांव में जमीन विवाद के दौरान मारपीट, धमकी और घर जलाए जाने तक के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि कई स्तरों पर शिकायत, मेल और आवेदन देने के बावजूद न तो आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा और न ही स्थानीय पुलिस ने निष्पक्ष जांच की।
पीड़ित ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच, दोषी संस्थानों का लाइसेंस रद्द करने, जिम्मेदार अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज करने और पीड़ित कर्मचारियों को न्याय दिलाने की मांग की है। अब यह देखना होगा कि शासन और जांच एजेंसियां इस गंभीर आरोपों वाले मामले में क्या कार्रवाई करती हैं।



