आजिविका डबरी” से किसानों होगे आर्थिक स्थिति में सबल

राजधानी से जनता तक/ चरण सिंह क्षेत्रपाल
गरियाबंद/देवभोग – छत्तीसगढ़ राज्य सरकार द्वारा संचालित महात्वाकांक्षी योजना “आजिविका डबरी ” मोर गांव मोर पानी महाअभियान गांवों में आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने राज्य सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वालों उन गरीब किसानों को देने वाली है जो शासन -प्रशासन द्वारा बनाए गए नियमावली में पात्रता रखते हैं जैसे कि पात्रता है,अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति हो।वन अधिकार पत्र धारक, प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राही, घूमंतू ( ख़ानाबदोश) एवं विमुक्त जनजाति, तथा गरीब रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले परिवार।
कार्य स्थल चयन व आकार
डबरी का आकार 20×20×3( मीटर में) , भूमि की आवश्यकता,25 डिस्मिल (वर्म व मेढ़) को मिलाकर।डबरी के लिए सबसे उपयुक्त भूमि निचली व मध्यम मिट्टी की गहराई कम से कम 3 मीटर तक होनी चाहिए। बारिश के पानी की पर्याप्त आवक वाले स्थान पर डबरी बनाने हेतु स्थल निर्धारण होगी।
क्लार्ट ऐप का उपयोग करना
सम्पूर्ण चक में नमी के स्तर को बढ़ाने के लिए श्रृंखला में डबरियों का निर्माण किया जाना।
उद्देश्य
डबरी में वर्षा जल संरक्षण, भूमिगत जल स्तर में सुधार, खेतों के लिए सिंचाई की व्यवस्था करना, सतत् आजिविका हेतु वृक्षारोपण, मत्स्य व बतख पालन गतिविधियों से जुड़ाव।
इस योजना से लाभ लेने हेतु किसान आवेदन हेतु आवश्यक दस्तावेज जमा करना होगा जैसे कि सहमति पत्र व कार्य मांग पत्र,जाब कार्ड, भूमि का खसरा,बी1 , नक्शा,वन अधिकार पत्रक की छायाप्रति, बीपीएल कार्ड, आईडी या प्रधानमन्त्री आवास हितग्राही आईडी अथवा छोटे व सीमांत किसान की स्थिति में पटवारी प्रतिवेदन, ग्राम पंचायत/ ग्राम सभा में अनुमोदन, साथ में हितग्राहियों के कार्य स्थल का फोटो ग्राफ (अक्षांश और देशांतर के साथ)
डबरी निर्माण के समय ध्यान देने योग्य महत्वपूर्ण बातें
संबंधित विभाग के कर्मचारियों ने बताया कि डबरी निर्माण हेतु उक्त किसानों को महत्वपूर्ण योग्य बातें को ध्यान में रखनी होगी, जैसे कि ले आउट के समय ही वर्म व मेढ़ के लिए चिन्ह (निशान) देना, पर्याप्त आकार का इनलेट ( आवक) एवं आउटलेट निकासी का प्रबंधन करना, इनलेट में छोटे आकार का सिल्फ ट्रेप डबरी में एक -एक फिट लम्बवत गहराई (सीढ़ीनुमा) पर मिट्टी की खुदाई एक से डेढ़ मीटर की जगह छोड़कर मेढ़ का निर्माण करना।खुदाई कार्य प्रारंभ करने हेतु सबसे उपयुक्त समय – नवंबर/ दिसंबर माह में होता है।
संघन व सतत् आजिविका माडल तैयार करना
मच्छली पालन,बतख पालन, गड्ढा व मचास पद्धति से सब्जी की खेती, मेड़ में दलहन फसलों अरहर एवं फलदार वानिकी पेड़ पौधे का संघन रोपण किया जाना जैसे कि केला,मूंगना, नींबू, आंवला,बास, सीताफल आदि।
माडल के क्रियान्वयन से लाभार्थी ग्रामीण परिवार की अतिरिक्त आय लगभग एक लाख रुपए तक न्यूनतम होना चाहिए।
कार्य स्थल की गुणवत्ता
काम चालू करवाने से पहले बोर्ड बनाना, बोर्ड साइज हितग्राही मूलक 3 फीट,4 फीट लंबा तक होना चाहिए। सभी डबरी का साइज़ 20 मीटर,20 मीटर,3 मीटर गहरा होना चाहिए।
सभी डबरी में इंटेल पानी आने के लिए और आउट लेट पानी जाने के लिए बनाना है, तथा सिल्ट चेम्बर्स भी बनाना है। जहां से मिट्टी खोदाई होना है, और मिट्टी डालना है, उनके बीच में 2 मीटर का गैप रखना है। मेड़ का साइज़ ऊपर में 0.60 मीटर नीचे 3 मीटर गहरा रखना है।स्टेप 10 रहेगा,स्टेप 1 फीट गहरा होगा।
Author: Rajdhani Se Janta Tak
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