राहुल गांधी की चेतावनी और सचिन पायलट की चुप्पी के बीच सूरजपुर कांग्रेस में बिखराव।

राजनीतिक विश्लेषण/सूरजपुर……

जमीनी संगठन कमजोर, प्रदेश प्रभारी से जिला अध्यक्ष तक जवाबदेही के सवाल।

मोहन प्रताप सिंह

राजधानी से जनता तक, सूरजपुर/:– कांग्रेस नेता राहुल गांधी लगातार यह कहते रहे हैं कि संगठन की मजबूती, कार्यकर्ताओं को सम्मान और आंतरिक लोकतंत्र के बिना कांग्रेस सत्ता में वापसी नहीं कर सकती। वहीं छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के प्रमुख चेहरा माने जाने वाले सचिन पायलट भी बार-बार संगठनात्मक अनुशासन और समन्वय की बात करते रहे हैं। लेकिन इन दावों और बयानों के उलट सूरजपुर जिले में कांग्रेस संगठन की स्थिति इन चेतावनियों को नज़रअंदाज़ करती हुई दिखाई दे रही है।

नवनियुक्त जिला अध्यक्ष के बाद खुलकर सामने आई गुटबाजी

सूरजपुर जिला कांग्रेस कमेटी के नवनियुक्त अध्यक्ष शशि सिंह कोराम के पदभार संभालने के बाद पार्टी के भीतर गुटबाजी खुलकर सामने आ गई है। संगठन में समन्वय स्थापित करने और सभी वर्गों को साथ लेने की बजाय आपसी खींचतान और उपेक्षा की शिकायतें लगातार बढ़ती जा रही हैं।

भूपेश बघेल का दौरा, संगठन की हकीकत उजागर

प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के हालिया सूरजपुर दौरे के दौरान कांग्रेस संगठन की जमीनी सच्चाई साफ दिखाई दी। इस अहम राजनीतिक कार्यक्रम में जिले, ब्लॉक और क्षेत्र स्तर के कई वरिष्ठ नेता, पूर्व पदाधिकारी और सक्रिय कार्यकर्ता नदारद रहे।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह अनुपस्थिति किसी संयोग का परिणाम नहीं, बल्कि संगठन के भीतर लंबे समय से पनप रही नाराज़गी और संवादहीनता का संकेत है।

राहुल गांधी की सोच से उलट जमीनी तस्वीर

राहुल गांधी लगातार यह कहते आए हैं कि कांग्रेस को ऊपर से नहीं, नीचे से मजबूत किया जाना चाहिए। लेकिन सूरजपुर में दिखाई दे रही स्थिति बताती है कि कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नेताओं को न तो सम्मान मिल रहा है, न ही निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी। इसका नतीजा यह है कि पार्टी के अनुभवी चेहरे धीरे-धीरे खुद को संगठन से अलग महसूस करने लगे हैं।

जिला अध्यक्ष की कार्यशैली पर उठते गंभीर सवाल

नवनियुक्त जिला अध्यक्ष पर यह आरोप लग रहा है कि वे सभी गुटों को जोड़ने के बजाय सीमित लोगों के साथ ही सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। नाराज नेताओं और कार्यकर्ताओं को मनाने की दिशा में कोई ठोस पहल नज़र नहीं आ रही है, जिससे संगठनात्मक दूरी और गहरी होती जा रही है।

पद की राजनीति हावी, संगठन पीछे

कार्यक्रमों में जो कुछ चेहरे सक्रिय नजर आ रहे हैं, उन्हें लेकर पार्टी के भीतर यह चर्चा आम है कि उनकी मौजूदगी पद की अपेक्षाओं से जुड़ी हुई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि अपेक्षित पद नहीं मिले, तो यही चेहरे भी आने वाले समय में निष्क्रिय हो सकते हैं।

प्रदेश प्रभारी, जिला प्रभारी की जिम्मेदारी

छत्तीसगढ़ कांग्रेस में संगठनात्मक संतुलन की जिम्मेदारी केवल जिला स्तर तक सीमित नहीं है। प्रदेश प्रभारी, जिला प्रभारी और प्रदेश नेतृत्व—जिसमें सचिन पायलट की अहम भूमिका मानी जाती है—की चुप्पी भी कई सवाल खड़े कर रही है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि समय रहते हस्तक्षेप नहीं हुआ, तो गुटबाजी और गहरी हो सकती है।

तीन विधानसभा सीटों का दावा या राजनीतिक भ्रम?

संगठन में बिखराव और असंतोष के बीच सूरजपुर जिले की तीनों विधानसभा सीटें जीतने के दावे किए जा रहे हैं। लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जब जमीनी संगठन कमजोर हो और कार्यकर्ता असंतुष्ट हों, तब ऐसे दावे केवल राजनीतिक भ्रम बनकर रह जाते हैं।

जोगी कांग्रेस से आए नेताओं पर भरोसा?

यह सवाल भी तेजी से उठ रहा है कि क्या जिला नेतृत्व जोगी कांग्रेस से आए नेताओं के सहारे चुनावी रणनीति तैयार कर रहा है। यदि ऐसा है, तो यह कांग्रेस के पुराने और समर्पित कार्यकर्ताओं के लिए निराशाजनक संकेत है।

निष्कर्ष: राहुल गांधी की चेतावनी को गंभीरता से लेना होगा

सूरजपुर कांग्रेस की मौजूदा स्थिति यह स्पष्ट करती है कि यदि राहुल गांधी की संगठनात्मक चेतावनियों और सचिन पायलट की जिम्मेदारी को जमीनी स्तर पर गंभीरता से नहीं लिया गया, तो इसका सीधा असर आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की स्थिति पर पड़ेगा।

अब सवाल स्पष्ट है

क्या केंद्रीय और प्रदेश नेतृत्व समय रहते सूरजपुर संगठन को संभालेगा, या यह बिखराव कांग्रेस के लिए राजनीतिक नुकसान बन जाएगा?

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