प्रशासनिक सर्जरी या राजनीतिक दबाव?
अनुराज साहू जिला प्रमुख /सारंगढ़ बिलाईगढ़ राजधानी से जनता तक
सारंगढ़। नवगठित जिला सारंगढ़-बिलाईगढ़ एक बार फिर प्रशासनिक फेरबदल को लेकर सुर्खियों में है। जिले के गठन के अभी चार वर्ष भी पूरे नहीं हुए हैं, लेकिन इस दौरान कलेक्टरों के लगातार बदलते चेहरे अब आम जनता के बीच चर्चा का बड़ा विषय बन चुके हैं। शासन ने अब जिले की कमान 2016 बैच की आईएएस अधिकारी पद्मिनी साहू को सौंप दी है, जो जिले की पांचवीं कलेक्टर होंगी।
लगातार हो रहे तबादलों ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। क्या यह प्रशासनिक आवश्यकता है या फिर जिले की राजनीति में बढ़ती खींचतान का परिणाम?
‘विकास पुरुष’ की विदाई ने बढ़ाई चर्चाएं-
जिले में अपनी सरल, सहज और जनसुलभ कार्यशैली के कारण पहचान बनाने वाले डॉ. संजय कन्नौजे का स्थानांतरण अचानक होने से राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
डॉ. कन्नौजे को जिले में विकास कार्यों को गति देने वाला अधिकारी माना जा रहा था। सड़क, राजस्व, जनसुनवाई और विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में उनकी सक्रियता की चर्चा आम थी। ऐसे में उनका तबादला लोगों को हैरान कर रहा है।
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि जिले की अंदरूनी राजनीतिक खींचतान और व्यक्तिगत समीकरण प्रशासनिक फैसलों पर भारी पड़ रहे हैं।
जहां सिविल सेवा व्यवस्था में सक्षम अधिकारियों को स्थिर कार्यकाल देने की बात कही जाती है, वहीं सारंगढ़-बिलाईगढ़ में बार-बार हो रहे बदलाव इस व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
सरकार के दावे बनाम जमीनी हकीकत-
सरकार ने हाल ही में सुशासन तिहार और आगामी जनगणना कार्यों को देखते हुए अधिकारियों के तबादलों पर रोक की बात कही थी।
जनता इस घोषणा को प्रशासनिक स्थिरता की दिशा में सकारात्मक कदम मान रही थी, लेकिन अचानक हुए इस बदलाव ने लोगों को चौंका दिया।
अब आमजन के बीच यह सवाल उठ रहा है कि जब स्थानांतरण नहीं करने की बात कही गई थी, तो फिर यह फैसला किन परिस्थितियों में लिया गया?
नई कलेक्टर पद्मिनी साहू से नई उम्मीदें-
राजनीतिक चर्चाओं और प्रशासनिक हलचल के बीच जिले को नई कलेक्टर पद्मिनी साहू से बड़ी उम्मीदें हैं।
बीएससी और एलएलबी की शैक्षणिक पृष्ठभूमि रखने वाली पद्मिनी साहू को संवेदनशील, व्यवहारिक और जनहित के मुद्दों को गंभीरता से समझने वाली अधिकारी माना जाता है।
उनकी कार्यशैली को लेकर यह उम्मीद जताई जा रही है कि वे जिले में प्रशासनिक स्थिरता लाने के साथ-साथ विकास कार्यों को नई दिशा देंगी।
सबसे बड़ी चुनौती—
नवगठित जिला होने के कारण सारंगढ़-बिलाईगढ़ को मजबूत प्रशासनिक नेतृत्व की आवश्यकता है।
लगातार कलेक्टर बदलने से विकास परियोजनाएं प्रभावित होती हैं, योजनाओं की गति धीमी पड़ती है और प्रशासनिक तंत्र में अस्थिरता बढ़ती है। इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ता है।
अब जिले की जनता की निगाहें नई कलेक्टर पर टिकी हैं कि वे राजनीतिक दबावों और प्रशासनिक चुनौतियों के बीच किस तरह संतुलन बनाकर जिले को विकास की नई दिशा देती हैं।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही सारंगढ़ को स्थायी नेतृत्व कब मिलेगा, या फिर यह जिला यूं ही तबादलों की प्रयोगशाला बना रहेगा?
Author: Rajdhani Se Janta Tak
राजधानी से जनता तक न्यूज वेबसाइट के आलावा दैनिक अखबार, यूटयूब चैनल के माध्यम से भी लोगो तक तमाम छोटी बड़ी खबरो निष्पक्ष रूप से सेवा पहुंचाती है




