नारायणपुर। जिले की सांस्कृतिक विरासत और प्राचीन ज्ञान को संरक्षित करने के लिए जिला प्रशासन द्वारा चलाया जा रहा ‘ज्ञानभारतम् राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान’ अब जनभागीदारी का रूप लेने लगा है। कलेक्टर नम्रता जैन के नेतृत्व में संचालित यह अभियान सदियों पुरानी हस्तलिखित पांडुलिपियों को खोजकर उन्हें डिजिटल माध्यम से सुरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बन गया है।
कलेक्टर नम्रता जैन ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि घरों, मंदिरों और निजी संग्रहों में सुरक्षित रखी गई पांडुलिपियां हमारी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर हैं। चाहे वे कागज, भोजपत्र या ताड़पत्र पर लिखी गई हों, उन्हें संरक्षित करना आने वाली पीढ़ियों के लिए जरूरी है। उन्होंने इस अभियान को जन-आंदोलन का स्वरूप देने पर जोर दिया।
अभियान के तहत आधुनिक तकनीक का भी उपयोग किया जा रहा है। ‘ज्ञानभारत’ मोबाइल ऐप के जरिए मौके पर ही पांडुलिपियों की तस्वीरें अपलोड कर उनकी जियो-टैगिंग की जा रही है। इससे दुर्लभ दस्तावेजों का डेटा सुरक्षित रहेगा और भविष्य में शोधकर्ताओं को यह सामग्री आसानी से उपलब्ध हो सकेगी।
अभियान की सफलता की झलक डुमरतराई गांव में देखने को मिली, जहां स्थानीय नागरिकों ने अपनी पारंपरिक धरोहर प्रशासन को सौंपकर संरक्षण की दिशा में सराहनीय पहल की। कल्याण सिंह भोयर के पास से प्राचीन चिकित्सा पद्धति से जुड़ी दुर्लभ पांडुलिपि मिली, जबकि गौरीशंकर भोयर के संग्रह से ‘कलंकी भागवत’ और ‘पांजी यंत्र’ जैसी ऐतिहासिक सामग्री सामने आई।
इन योगदानों के लिए जिला पंचायत अध्यक्ष नारायण मरकाम और नगर पालिका अध्यक्ष इंद्र प्रसाद बघेल ने दोनों नागरिकों को शॉल, श्रीफल और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया।
अभियान को सफल बनाने के लिए जिला, जनपद और नगर पालिका स्तर पर विशेष समितियों का गठन किया गया है। बैठक में पद्मश्री पंडीराम मण्डावी, जनप्रतिनिधि संध्या पवार, लेखक शिव कुमार पाण्डेय, अपर कलेक्टर वीरेंद्र बहादुर पंचभाई और एसडीएम अभयजीत मण्डावी सहित कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
Author: Rajdhani Se Janta Tak
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