सरपंच जी की सील और बिना दुकान का बिल.. पढ़े पूरी खबर

अनुराज साहू जिला प्रमुख/ राजधानी से जनता तक 

सारंगढ़-बिलाईगढ़। कहते हैं कि आधुनिक विज्ञान ने बहुत तरक्की कर ली है, लेकिन सारंगढ़ जनपद पंचायत के ग्राम पंचायत टिमरलगा में जो ‘वैज्ञानिक चमत्कार’ हुआ है, उसे देखकर नासा (NASA) के वैज्ञानिक भी अपना सिर पकड़ लेंगे। यहाँ बिना किसी ईंट, पत्थर, सीमेंट या दुकान के वजूद के ही लाखों रुपये का विकास ‘कागज़ों पर’ लहलहा रहा है। मामला सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी योजना ’15वें वित्त आयोग’ की राशि को ठिकाने लगाने का है, जहाँ सरपंच-सचिव की जुगलबंदी ने मिलकर भ्रष्टाचार का ऐसा ‘टाइट’ और ‘अन्टाइट’ खेल खेला है कि जनता सिर्फ देखती रह गई।

मिस्टर इंडिया’ निकले विश्वनाथ ट्रेडर्स-

नियम कहता है कि पंचायत का कोई भी काम सिर्फ उसी सप्लायर से होगा जिसके पास सक्रिय GST नंबर हो और जमीन पर उसकी असली दुकान हो। लेकिन टिमरलगा के नीति-निर्माताओं को जमीन से क्या लेना-देना? सूत्रों की मानें तो बिलों में जिस ‘विश्वनाथ ट्रेडर्स’ (पता- मेन रोड रक्सा , सारंगढ़) का नाम शान से दर्ज है, उसका जमीन पर कोई भौतिक वजूद ही नहीं है। यह एक ऐसी ‘अदृश्य दुकान’ है जो सिर्फ सरपंच जी के सपनों में और उनके द्वारा दबाई जाने वाली सील पर ही जीवित है। बिना दुकान के ही यहाँ से गिट्टी, रेत, स्ट्रीट लाइट और सबमर्सिबल पंप की ऐसी ‘काल्पनिक सप्लाई’ हुई कि सरकारी खजाने से लाखों रुपये सीधे गायब हो गए।

बिल देखकर चकरा जाएगा सिर-

₹50,000 की गिट्टी और ₹54,000 का नल!

भ्रष्टाचार के इस डिजिटल और कागजी युग में भुगतानों की फेहरिस्त इतनी सलीके से बनाई गई है कि ईमानदारी भी शरमा जाए। सामने आए बिलों के कुछ ‘पवित्र’ आंकड़े इस प्रकार हैं जैसे –

स्टोन टिल्ला और रेत के नाम पर ₹50,000, ₹43,000 और ₹81,000 के बिल (बिना यह जाने कि ये पत्थर गिरे कहाँ?)

स्ट्रीट लाइट और शौचालय मरम्मत के नाम पर ₹50,400 और ₹30,200 (गाँव में अंधेरा है, पर बिलों में रोशनी चकाचौंध है)

पंप रिपेयरिंग और नल टैप के नाम पर ₹48,000, ₹36,000 और ₹54,000 (पानी आए न आए, पैसों का बहाव नहीं रुकना चाहिए)

इन सभी बिलों पर टिमरलगा सरपंच की सील और दस्तखत ऐसे चमक रहे हैं, मानो कोई बहुत बड़ा राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार दिया जा रहा हो।

गाँव में पानी-नाली का अकाल, कागज़ों पर लक्ष्मी मेहरबान!-

एक तरफ जहाँ कागजों पर लाखों रुपये खर्च करके टिमरलगा को ‘पेरिस’ बनाने का दावा किया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ गाँव के असली बाशिंदे बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। नालियां बजबजा रही हैं, साफ-सफाई का नामोनिशान नहीं है और पीने के पानी के लिए त्राहि-त्राहि मची है। ग्रामीणों का कहना है, “हमारे यहाँ विकास सिर्फ सरपंच की सील और विश्वनाथ ट्रेडर्स के जादुई बिलों में ही आता है, हमारे घरों तक तो सिर्फ धूल और कीचड़ ही पहुँचता है।”

जनपद स्तर पर बैठे ‘धृतराष्ट्र’ कौन हैं?

अब सबसे बड़ा और यक्ष प्रश्न यह उठता है कि बिना किसी भौतिक सत्यापन के, बिना यह जांचे कि ‘विश्वनाथ ट्रेडर्स’ नाम की कोई चिड़िया रक्सा के मेन रोड पर दाना चुग भी रही है या नहीं, जनपद स्तर पर इन फर्जी बिलों को हरी झंडी कैसे मिल गई? क्या साहब लोगों की आँखों पर भी ‘गाँधी छाप’ की पट्टी बंधी हुई थी या फिर इस बहती गंगा में ऊपर तक हाथ धोए गए हैं?

ग्रामीणों की हुंकार

टिमरलगा के आक्रोशित ग्रामीणों ने अब आर-पार की लड़ाई का मूड बना लिया है। मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच, दोषी सरपंच-सचिव के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई और सरकारी खजाने से लूटी गई पाई-पाई की वसूली की मांग तेज हो गई है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस ‘कागजी जादूगर’ सरपंच और ‘भूतिया’ ट्रेडर्स पर कब और क्या एक्शन लेता है, या फिर फाइलें ठंडे बस्ते में डाल दी जाएंगी।

Rajdhani Se Janta Tak
Author: Rajdhani Se Janta Tak

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