96 वर्ष पुरानी दुर्लभ पांडुलिपि ने खोले इतिहास और लोकसंस्कृति के नए आयाम

रायपुर, 22 मई 2026 / भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा संचालित देशव्यापी ज्ञानभारतम पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान के तहत छत्तीसगढ़ के बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में 96 वर्ष पुरानी एक दुर्लभ हस्तलिखित पांडुलिपि मिली है। यह पांडुलिपि जिले के रामानुजगंज नगर के मध्य बाजार निवासी श्री रामेश्वर प्रसाद गुप्ता के घर से प्राप्त हुई, जिसे जिले की पहली दर्ज पांडुलिपि माना जा रहा है।
यह ऐतिहासिक दस्तावेज न केवल स्थानीय इतिहास और लोकसंस्कृति की अमूल्य धरोहर है, बल्कि इसमें तत्कालीन सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक जीवन की झलक भी देखने को मिलती है। पांडुलिपि का दस्तावेजीकरण ज्ञानभारतम अभियान के अंतर्गत किया गया है।
जिला स्तरीय समिति के नोडल अधिकारी श्री रामपथ यादव, सहायक नोडल अधिकारी श्री संजय कुमार गुप्ता तथा जिला ग्रंथपाल श्री राजकुमार शर्मा ने पांडुलिपि का सूक्ष्म अवलोकन किया। पांडुलिपि के संरक्षक श्री रामेश्वर प्रसाद गुप्ता ने बताया कि इसे उनके दादाजी श्री लक्ष्मी प्रसाद रौनियार ने लगभग 96 वर्ष पूर्व हस्तलिखित रूप में तैयार किया था। परिवार ने इस धरोहर को वर्षों तक सुरक्षित और संरक्षित रखा।
पांडुलिपि में रामानुजगंज क्षेत्र की जीवनरेखा मानी जाने वाली कन्हर नदी में आई ऐतिहासिक बाढ़ का विस्तृत वर्णन किया गया है। इसके साथ ही मां शारदा की स्तुति, भैरवी, द्रौपदी विनय, गजल, दोहा, चौगोला और दादरा जैसी साहित्यिक विधाओं का समावेश इसे और अधिक विशिष्ट बनाता है। इसमें अत्यंत कलात्मक शैली में तैयार किया गया वंश-वृक्ष भी आकर्षण का केंद्र है।

अधिकारियों ने पांडुलिपि की हस्तलिपि, भाषा और लेखन शैली को अत्यंत सुंदर एवं ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया।एंथ्रोपोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, जगदलपुर से पहुंचे प्रभारी अधिकारी श्री हरनेक सिंह ने मौके पर ही पांडुलिपि के डिजिटलीकरण और ऑनलाइन दस्तावेजीकरण की प्रक्रिया पूरी की।
उल्लेखनीय है कि ज्ञानभारतम अभियान देश की प्राचीन ज्ञान परंपरा, लोकसंस्कृति, जनजातीय विरासत और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में चलाया जा रहा एक महत्त्वपूर्ण राष्ट्रीय अभियान है।
अभियान के तहत अब जिले के नागरिक भी स्वप्रेरणा से आगे आकर अपनी पारिवारिक और ऐतिहासिक धरोहरों की जानकारी प्रशासन को उपलब्ध करा रहे हैं। जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि यदि उनके पास कोई प्राचीन ग्रंथ, पांडुलिपि, वंशावली या ऐतिहासिक दस्तावेज उपलब्ध हों, तो वे इसकी जानकारी जिला स्तरीय समिति को दें, ताकि प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को डिजिटल रूप में संरक्षित कर आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचाया जा सके।

Rajdhani Se Janta Tak
Author: Rajdhani Se Janta Tak

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